एग्रीकल्चर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, बिहार के संघर्ष की जीत डॉ. कुमार राजवर्धन को सौंपा गया पीआरओ का दायित्व
करीब एक दशक बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में सूचना व्यवस्था को मिली नई दिशा
एग्रीकल्चर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, बिहार के संघर्ष की जीत डॉ. कुमार राजवर्धन को सौंपा गया पीआरओ का दायित्व
करीब एक दशक बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में सूचना व्यवस्था को मिली नई दिशा

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में लगभग एक दशक से अधिक रिक्त पड़े सूचना/जनसंपर्क पदाधिकारी के दायित्व को लेकर चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यालय आदेश संख्या 376, दिनांक 29 दिसंबर 2025 के तहत डॉ. कुमार राजवर्धन, सहायक प्राध्यापक (पत्रकारिता एवं जनसंचार) को जनसंपर्क अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। इसे विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचना व्यवस्था को पुनः सक्रिय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
कृषि पत्रकारों के संघर्ष का परिणाम
यह निर्णय एग्रीकल्चर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, बिहार इकाई द्वारा जुलाई 2025 से लगातार किए जा रहे संवाद, पत्राचार और लोकतांत्रिक प्रयासों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। संगठन की ओर से इस विषय को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री, बिहार के कृषि मंत्री, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री तथा समस्तीपुर की सांसद को ज्ञापन सौंपे गए थे। साथ ही विश्वविद्यालय में सूचना तंत्र को मजबूत करने की मांग विभिन्न मंचों पर निरंतर उठाई जाती रही हैं।

अजय बिहार की प्रतिक्रिया
अजय बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रौशन कुमार एवं कार्यकारी सचिव रामजी कुमार ने संयुक्त रूप से डॉ. कुमार राजवर्धन को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। प्रदेश अध्यक्ष रौशन कुमार ने कहा कि यह फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि कृषि पत्रकारों के निरंतर और संगठित प्रयासों की जीत है। किसी भी शैक्षणिक एवं शोध संस्थान के लिए जनसंपर्क पीआरओ अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे प्रशासन, मीडिया और समाज के बीच पारदर्शी संवाद स्थापित होता है।
उन्होंने कहा कि की सक्रिय भूमिका से विश्वविद्यालय की योजनाओं, शोध उपलब्धियों और कार्यक्रमों की सटीक व समयबद्ध जानकारी आमजन और किसानों तक पहुँच सकेगी। साथ ही अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे विश्वविद्यालय की संस्थागत छवि और जनविश्वास दोनों मजबूत होंगे।
मीडिया संवाद को मिलेगा नया बल
कार्यकारी सचिव रामजी कुमार ने विश्वास जताया कि वर्ष 2026 बीबी के लिए ‘सूचना क्रांति’ का वर्ष साबित होगा। उन्होंने कहा कि अब विश्वविद्यालय के नवीनतम शोध, तकनीक और किसान-हितैषी नवाचार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंचों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेंगे। मीडिया प्रतिनिधियों को भी सूचना संग्रह और प्रसारण में स्पष्टता व सहूलियत मिलेगी।
सूचना व्यवस्था मजबूत होना संस्थान की साख का संकेत
किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय की पहचान केवल शैक्षणिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि उसकी सूचना पारदर्शिता और मीडिया संवाद से भी तय होती है। बीवी में करीब एक दशक तक सूचना/जनसंपर्क पदाधिकारी का दायित्व रिक्त रहना एक बड़ी चुनौती रहा।
अब डॉ. कुमार राजवर्धन को यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाना विश्वविद्यालय के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिससे किसानों, शोधकर्ताओं और समाज के साथ संवाद और अधिक सशक्त होगा।
बीबी में पीआरओ की भूमिका क्यों है अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंपर्क अधिकारी की भूमिका केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी करने तक सीमित नहीं होती। यह पद विश्वविद्यालय और किसानों के बीच सूचना सेतु का काम करता है
शोध और नवाचार को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाता है। मीडिया और प्रशासन के बीच पारदर्शी संवाद सुनिश्चित करता है
करीब एक दशक तक यह दायित्व खाली रहने के कारण विश्वविद्यालय की कई उपलब्धियां व्यापक समाज तक नहीं पहुँच सकीं। अब उम्मीद की जा रही है कि इस व्यवस्था के सक्रिय होने से बीबी देश के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों की कतार में और मजबूती से खड़ा होगा।

