चम्पारण आगमन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुला पत्र जे टी न्यूज, बेतिया: बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने मुख्यमंत्री के पश्चिम चंपारण आगमन पर खुला पत्र के माध्यम से कहा है कि बिहार के गन्ना उत्पादक किसानों को 550 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का मूल्य दिया जाए ।यह मांग अपने संघर्ष और स्मार– पत्र के माध्यम से बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ करता रहा है। लेकिन बिहार सरकार ने जो गन्ना के मूल्य का निर्धारण किया है। वह देश के किसी भी राज्य के गन्ना के दर से कम है। यह बिहार के गन्ना किसानों का शोषण है। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में जो 29 चीनी मिलें चल रही थी ।उसमें से मात्र 9 चीनी मिलें चल रही है ।जिसमें से 5 चीनी मिलें पश्चिम चंपारण में ही चल रही है ।शेष 20 चीनी मिलें जो बंद है। उनको चालू करने के लिए वर्षों से ईख उत्पादक संघ संघर्ष कर रहा है। जो बिहार के विकास के लिए भी बहुत जरूरी है । उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपनी प्रथम मंत्रिमंडलीय बैठक में 25 नई चीनी मिलों को चालू करने तथा 9 पुराने चीनी मिलों को भी चालू करने का निर्णय लिया है। उसमें अभी तक कहीं कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है ।उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में कृषि आधारित उद्योग की जाल बिछाने की जरूरत है ।इस रोशनी में बंद पड़े चीनी मिलों को तथा प्रस्तावित 25 चीनी मिलों को बिहार सरकार चालू कर दे ।तो निश्चित रूप से बिहार में विकास की एक नई लहर दौड़ जाएगी। बिहार से नौजवानों का पलायन रुक जाएगा और गन्ना जैसे नगदी फसल को लगाने और उसका लाभ लेने का मौका बिहार के किसानों को बड़े पैमाने पर मिल जाएगा । उन्होंने यह भी कहा कि चीनी मिलों द्वारा इथनॉल बनाने का कार्य हो रहा है और सभी चीनी मिलों के चालू हो जाने के बाद बिहार इथनॉल का एक हब बन सकता है। इसलिए मोदी सरकार द्वारा कारपोरेट जगत को लूटने और बिहार के किसानों को भुखमरी के कगार पर लाने की योजना के आधार पर खाने के अनाज आधारित इथनॉल प्लांट बिहार में लगाने की महिम पर अविलंब रोग लगाया जाए। क्योंकि खाने के अनाज पर आधारित यह इथनॉल प्लांट बिहार के अंदर भूख और बेकारी पैदा करने की साजिश है।

चम्पारण आगमन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुला पत्र

जे टी न्यूज, बेतिया: बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने मुख्यमंत्री के पश्चिम चंपारण आगमन पर खुला पत्र के माध्यम से कहा है कि बिहार के गन्ना उत्पादक किसानों को 550 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का मूल्य दिया जाए ।यह मांग अपने संघर्ष और स्मार– पत्र के माध्यम से बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ करता रहा है। लेकिन बिहार सरकार ने जो गन्ना के मूल्य का निर्धारण किया है। वह देश के किसी भी राज्य के गन्ना के दर से कम है। यह बिहार के गन्ना किसानों का शोषण है।
उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में जो 29 चीनी मिलें चल रही थी ।उसमें से मात्र 9 चीनी मिलें चल रही है ।जिसमें से 5 चीनी मिलें पश्चिम चंपारण में ही चल रही है ।शेष 20 चीनी मिलें जो बंद है। उनको चालू करने के लिए वर्षों से ईख उत्पादक संघ संघर्ष कर रहा है। जो बिहार के विकास के लिए भी बहुत जरूरी है ।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपनी प्रथम मंत्रिमंडलीय बैठक में 25 नई चीनी मिलों को चालू करने तथा 9 पुराने चीनी मिलों को भी चालू करने का निर्णय लिया है। उसमें अभी तक कहीं कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है ।उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में कृषि आधारित उद्योग की जाल बिछाने की जरूरत है ।इस रोशनी में बंद पड़े चीनी मिलों को तथा प्रस्तावित 25 चीनी मिलों को बिहार सरकार चालू कर दे ।तो निश्चित रूप से बिहार में विकास की एक नई लहर दौड़ जाएगी। बिहार से नौजवानों का पलायन रुक जाएगा और गन्ना जैसे नगदी फसल को लगाने और उसका लाभ लेने का मौका बिहार के किसानों को बड़े पैमाने पर मिल जाएगा ।


उन्होंने यह भी कहा कि चीनी मिलों द्वारा इथनॉल बनाने का कार्य हो रहा है और सभी चीनी मिलों के चालू हो जाने के बाद बिहार इथनॉल का एक हब बन सकता है। इसलिए मोदी सरकार द्वारा कारपोरेट जगत को लूटने और बिहार के किसानों को भुखमरी के कगार पर लाने की योजना के आधार पर खाने के अनाज आधारित इथनॉल प्लांट बिहार में लगाने की महिम पर अविलंब रोग लगाया जाए। क्योंकि खाने के अनाज पर आधारित यह इथनॉल प्लांट बिहार के अंदर भूख और बेकारी पैदा करने की साजिश है।

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