जननायक कर्पूर ठाकुर: भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध खड़ी एक अडिग दीवार
जननायक कर्पूर ठाकुर: भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध खड़ी एक अडिग दीवार

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: बिहार की धरती ने कई महान नेताओं को जन्म दिया, लेकिन भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर उस परंपरा के सबसे सशक्त स्तंभ थे, जिन्होंने सत्ता को सेवा और ईमानदारी का पर्याय बना दिया। समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव में जन्मे कर्पूरी ठाकुर जी ने जीवन भर भ्रष्टाचार, अन्याय और सामाजिक शोषण के विरुद्ध एक मज़बूत दीवार की तरह खड़े होकर संघर्ष किया।
उनका मानना था कि यदि शासन व्यवस्था में ईमानदारी नहीं होगी, तो गरीब और वंचित वर्ग सबसे अधिक पीड़ित होगा। यही कारण था कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने निजी स्वार्थ, सत्ता के सुख और राजनीतिक दबावों को कभी अपने सिद्धांतों पर हावी नहीं होने दिया। बिहार की राजनीति में जब भ्रष्टाचार सामान्य बात मानी जाने लगी थी, तब कर्पूरी ठाकुर जी सादगी, पारदर्शिता और नैतिक साहस का उदाहरण बने।
समस्तीपुर ही नहीं, पूरे बिहार में वे आम जनता के नेता थे। बिना किसी सुरक्षा तामझाम के लोगों के बीच पहुँचना, उनकी समस्याएँ सुनना और तुरंत समाधान की कोशिश करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “सरकार जनता की होती है, किसी दल या परिवार की नहीं।” यही सोच उन्हें अन्याय के विरुद्ध अडिग बनाती थी।

कर्पूरी ठाकुर जी ने प्रशासनिक स्तर पर भी ईमानदारी को बढ़ावा दिया। उन्होंने अफसरशाही में जवाबदेही तय करने, पक्षपात खत्म करने और गरीबों के हक़ को सुरक्षित करने के लिए कठोर निर्णय लिए। चाहे वह पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का मामला हो या हिंदी को प्रशासन की भाषा बनाना—हर निर्णय में सामाजिक न्याय की स्पष्ट झलक दिखती है।
आज जब बिहार और देश भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब कर्पूरी ठाकुर जी का जीवन मार्गदर्शक बनकर सामने आता है। उन्होंने यह साबित किया कि राजनीति में रहकर भी ईमानदार रहा जा सकता है और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़ा हुआ जा सकता है।
उनकी विरासत समस्तीपुर से निकलकर पूरे बिहार की चेतना बनी। जननायक कर्पूरी ठाकुर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं।
डॉ. सीता कुमारी
सहायक प्रचार्य, गृहविज्ञान विभाग,
जी.के.पी.डी कॉलेज, समस्तीपुर ।


