स्नातक–शिक्षक एम एल सी चुनाव के लिए स्थायी वोटर आईडी जारी करने की मांग पटना
स्नातक–शिक्षक एम एल सी चुनाव के लिए स्थायी वोटर आईडी जारी करने की मांग
पटना

बिहार में स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र एम एल सी चुनाव को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक अहम मांग सामने आई है। वरिष्ठ सम्पादक आर. के राय ने मुख्य चुनाव आयुक्त, बिहार निर्वाचन पदाधिकारी, पटना एवं निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी, दरभंगा स्नातक/शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र-सह- आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा को ईमेल भेज कर यह आग्रह किया गया है कि जिस प्रकार आम चुनावों में मतदाताओं को स्थायी पहचान पत्र जारी किया जाता है, उसी तरह स्नातक एवं शिक्षक एम एल सी चुनाव के लिए भी स्थायी मतदाता पहचान पत्र जारी किया जाए।
उनका कहना है कि प्रत्येक चुनाव के समय नया मतदाता सूची (एमएलसी) तैयार करना न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। राय का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई बार प्रलोभन देकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की शिकायतें सामने आती हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
मांग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चुनाव के समय विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा सकता है, ताकि त्रुटियों का सुधार हो सके, लेकिन मतदाता पहचान पत्र स्थायी रूप से एक बार ही जारी किया जाए, जिससे बार-बार सूची बनाने की आवश्यकता न पड़े।
इसके साथ ही राय ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि हर वर्ष स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की सूची सीधे विश्वविद्यालयों से प्राप्त कर उन्हें स्वतः स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा जाए। इससे न केवल प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि युवा स्नातकों की लोकतांत्रिक भागीदारी भी सुनिश्चित हो सकेगी।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के संदर्भ में भी यही मांग दोहराई गई है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों से नियमित रूप से अद्यतन शिक्षक सूची के आधार पर मतदाता सूची का रखरखाव किया जाए।
राय का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो:
• चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी,
• अनावश्यक खर्च में कमी आएगी,
• प्रलोभन और अनियमितताओं पर रोक लगेगी और
• स्नातक और शिक्षक समाज का चुनाव प्रणाली पर विश्वास मजबूत होगा ।
अब देखना यह है कि बिहार निर्वाचन पदाधिकारी इस सुझाव पर क्या रुख अपनाते हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में इसे एक सार्थक और दूरगामी सुधारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

