सरकारी शिक्षक और भू-माफियाओं के गठजोड़ से दलित की जमीन पर कब्जा? Wed
सरकारी शिक्षक और भू-माफियाओं के गठजोड़ से दलित की जमीन पर कब्जा?
अब भी न्याय नहीं मिला तो परिवार समेत आत्मदाह करूंगा – पीड़ित

जे टी न्यूज़, फारबिसगंज/जोगबनी : बथनाहा थाना क्षेत्र के भटियाही गांव में एक दलित परिवार की जमीन पर कथित कब्जे का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। नगर पंचायत जोगबनी के खजुरबाड़ी वार्ड संख्या-15 निवासी शंभू चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनकी खरीदी हुई जमीन पर कब्जा कराने में सरकारी शिक्षक मिंटू मेहता तथा कथित भू-माफियाओं की भूमिका रही है और आज भी कब्जाधारियों को उनका संरक्षण प्राप्त है।
पीड़ित शंभू चौधरी ने अपने आवेदन में बताया है कि वर्ष 2015 में उन्होंने फारबिसगंज मुसहरी वार्ड संख्या-4 निवासी सरकारी शिक्षक मिंटू मेहता, पिता तेज नारायण मेहता से खाता संख्या-161, खेसरा संख्या-555/56, रकबा 8 डिसमिल 400 वर्ग कड़ी जमीन खरीदी थी।
शंभू चौधरी के अनुसार वर्ष 2017 में एक दुर्घटना में उनका पैर टूट गया, जिसके कारण वे लगभग एक वर्ष तक बिस्तर पर रहे। इसी दौरान झगरू मेहता उर्फ संतोष मेहता एवं सोनू मेहता, पिता लाल मोहन मेहता, निवासी भटियाही वार्ड संख्या-24, बथनाहा ने कथित रूप से जमीन पर कब्जा कर लिया। पीड़ित का आरोप है कि कब्जाधारियों को जमीन विक्रेता मिंटू मेहता तथा कथित भू-माफियाओं का समर्थन प्राप्त है, जिसके कारण आज तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
“दलित और गरीब होने के कारण नहीं मिल रहा न्याय”
आवेदन में शंभू चौधरी ने कहा है कि वे अनुसूचित जाति से आते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके विपरीत कब्जाधारी पक्ष आर्थिक रूप से मजबूत और प्रभावशाली है। यही कारण है कि पिछले नौ वर्षों से वे न्याय के लिए अंचल कार्यालय फारबिसगंज और बथनाहा थाना का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार न्याय की लड़ाई, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बावजूद उनकी जमीन वापस नहीं दिलाई गई।
मानवाधिकार आयोग से लगाई न्याय की गुहार
थक-हार कर अब शंभू चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जमीन पर से कब्जा हटवाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि आयोग से उन्हें अंतिम उम्मीद है।

आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप
अपने आवेदन में शंभू चौधरी ने स्पष्ट लिखा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे परिवार सहित आत्मदाह करने को विवश होंगे। इस चेतावनी के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
सवालों के घेरे में प्रशासन, अब आयोग की कार्रवाई पर नजर
एक दलित परिवार की जमीन पर कथित कब्जा, सरकारी शिक्षक और भू-माफियाओं के समर्थन के आरोप तथा नौ वर्षों तक न्याय के लिए भटकने की कहानी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।
