देश में विभिन्न प्रकार के धार्मिक, साम्प्रदायिक व कबीले की पहचान वाली झंडे, प्रतीक, नारों आदि के बदले सारे देश में सिर्फ तिरंगा औऱ वंदे मातरम को ही स्वीकार किया जाना चाहिए: विजय अमित आयाम
देश में विभिन्न प्रकार के धार्मिक, साम्प्रदायिक व कबीले की पहचान वाली झंडे, प्रतीक, नारों आदि के बदले सारे देश में सिर्फ तिरंगा औऱ वंदे मातरम को ही स्वीकार किया जाना चाहिए: विजय अमित आयाम

जेटी न्यूज
डी एन कुशवाहा
अरेराज पूर्वी चंपारण- अपने देश में प्रतीक, परंपरा, संस्कृति, आस्था, धर्म, जाति, संप्रदाय आदि मानव जाति के लिए आदि काल से उसकी गरिमामई प्रतिष्ठा और पहचान बनाने में सक्षम है। जिसमें पूरे समाज को जोड़ने वाली शक्ति समाहित है। लेकीन जब अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध लगभग सभी भारतीयों ने एक सूत्र में बंधकर संघर्ष किया। जिसके फलस्वरुप देश आजाद हुआ औऱ आज एक तिरंगा औऱ एक संविधान को अपनाकर जब देश चल रहा है तो पूरे देश में विभिन्न प्रकार के धार्मिक, साम्प्रदायिक और कबीले की पहचान वाली झंडे, प्रतीक, नारों आदि के बदले सारे देश में सिर्फ तिरंगा और वंदे मातरम को ही स्वीकार किया जाना चाहिए!! उक्त बातें आयाम के निदेशक विजय अमित ने गुरुवार को कही।

उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अपने घरों पर अपने संप्रदाय विशेष का प्रदर्शन करने की कोशिश में भगवा या हरा अथवा अपने संप्रदाय का झंडे को लगा देते है जो किसी न किसी रूप में सामाजिक प्रेम के स्थान पर आपसी सौहार्द को बिगाड़ देता है ! इससे देश की अखण्डता औऱ एकता का स्वरूप कमजोर होता है। साथ ही यह सामाजिक व्यवस्था के लिए भेदभाव को बढ़ावा देता है।

वर्तमान समय में सारे देश में एकजुटता ,सामाजिक व सौहार्दपूर्ण आपसी समझ को विकसित करने की जरूरत है। इसलिए हमें संविधान औऱ तिरंगा के लिए समर्पित होने की जरूरत है! विभिन्न जातियों संप्रदाय आदि व्यक्तिगत होना चाहिए न कि इसका प्रदर्शन किसी पूर्वाग्रह के साथ कराने के लिए होना चाहिए। क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों की कुर्बानी के बाद यह आजादी मिली है!एक देश– भारत!एक झंडा — तिरंगा!!एक नारा–वंदे मातरम!!!


