लोकसभा से 143 सांसदों का निष्कासन संविधान और लोकतंत्र को समाप्त करना है

लोकसभा से 143 सांसदों का निष्कासन संविधान और लोकतंत्र को समाप्त करना है

– प्रभुराज नारायण राव

 

जे टी न्यूज

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर लोक सभा स्पीकर द्वारा सही बातों को रखने या पूछने पर विपक्ष के 141 सांसदों को निष्कासित कर देना । भारतीय लोकतंत्र को समाप्त कर देने की सुनियोजित साजिश है।

भारत के संसदीय लोकतंत्र में संविधान ने सभी सांसदों को यह अधिकार दिया है कि वो लोकतंत्र की या संविधान की रक्षा का सवाल हो या सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं में कटौती करने का सवाल हो या आम जनता की समस्याओं को उजागर करने का सवाल हो। सांसदों को पूरा अधिकार है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ईक्षा के विरुद्ध कुछ भी नहीं सुनना चाहते हैं और जो सांसद नहीं मानते उनके अस्तित्व को ही समाप्त कर देना चाहते हैं।

वर्तमान लोक सभा सत्र में 143 सांसदों को सदन से निष्कासित कर देना । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंकुशता को तो दर्शा ही रहा है। इनके फासीवादी कारवाई भी स्पष्ट दिखने लगा है।

विधान सभा चुनाव के बाद संसद सत्र के प्रारंभिक दौर में लोक सभा में सदन के नेता द्वारा यह कहना कि अकेले एक पूरी विपक्ष पर भारी और उस पर भाजपा सांसदों का ताली बजाना । यह तो साबित कर ही दिया है कि संसदीय लोकतंत्र पर नहीं बल्कि भाजपा सांसद फासीवादी नायक के गुलाम हैं और नायक के मर्जी के अनुरुप ही अपना व्यवहार करते हैं।

 

अभी अभी विधान सभा चुनाव में यह स्पष्ट रुप में परिलक्षित हो गया कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर आंतरिक जनवाद नहीं है। बल्कि एक व्यक्ति की तानाशाहियत है। जब विधानसभा चुनाव में पार्टी के बिना फैसले के 1 दर्जन सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री के आदेश पर विधान सभा चुनाव लड़ने को विवश कर दिया और किसी ने भी उफ तक नहीं किया।

हमने 1975 के आपातकाल को भी देखा है। उस समय की अधिनायकवादी ताकत ने विना विपक्ष के लोक सभा के सदन को चलाने का काम किया था। लेकिन जब लोक सभा का चुनाव हुआ ,तो समूची उत्तर भारत में एक भी सीट दर्शन नहीं हुआ था। स्वयं स्व. इन्दिरा गांधी को भी मुहकी खानी पड़ी थी। जो हिटलर की चाल चलेगा , वो हिटलर की मौत मरेगा।

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