प्रेम कोई व्यापार नहीं

प्रेम कोई व्यापार नहीं

जे टी न्यूज
हाँ प्रेम कोई ……….व्यापार नहीं,
महज सात दिनों का त्यौहार नहीं।

प्रेम आत्माओं का ….आनंत्य समर्पण है,
मन के सूखते शाख पे.. खिलता सुमन है।
जीवनरूपी रेगिस्तान में दोघूँट प्रेम मधुवन है,
प्रेम स्वयं का विसर्जन है गंगा की जलधार है।
प्रेम मधुमय बसंती बयार है,कोई व्यापार नहीं।

प्रेम उल्लास नहीं,, कठोर उपवास है,
जीने की आस है ,,रूह की प्यास है।
प्रेम क्षणिक सुख नहीं अंतहीन इंतजार है,
नि:स्वार्थ प्रेम शाश्वत सत्य है क्षणभंगुर नहीं
प्रेम प्रकृति का उपहार है कोई व्यापार नहीं।,

प्रेम सृष्टि के कण-कण में है जीवन का आधार है,
मन की डाली-डाली पर खिला हुआ हरसिंगार है।
प्रेम फागुनी रंगों से रंगा विरही तनमन का श्रृगांर है
अनमोल चाहतों को कोई खरीदे ऐसा बाजार नहीं
प्रेम एहसासों का बंधन है ,,कोई व्यापार नहीं है।।
स्वरचित
अनुपमा सिंह सोनी

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