हिंदी कहानी लेखन में बढ़ रहा है महिलाओं का दबदबा अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता में पूनम मनु सहित दस महिलाओं ने जीते पुरस्कार, पुरुष पांच तक रहे सीमित

हिंदी कहानी लेखन में बढ़ रहा है महिलाओं का दबदबा

अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता में
पूनम मनु सहित दस महिलाओं ने जीते पुरस्कार, पुरुष पांच तक रहे सीमित

हेमलता म्हस्के/जै टी न्यूज़

नई दिल्ली।


मौजूदा सदी में हिंदी साहित्य में खासकर कहानी विधा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी काबिले तारीफ है। साहित्य के क्षेत्र में महिलाओं की ऐसी भागीदारी पिछली सदी में नहीं थी। पिछली सदी में महिलाओं की संख्या अंगुलियों पर गिने जाने लायक तक ही सीमित थी। लेकिन अब नई सदी में विभिन्न क्षेत्रों के साथ साहित्य लेखन में भी महिलाएं बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। यह हैरान करने से ज्यादा प्रसन्नता की बात है कि महिलाएं अब इस संसार में चुप नहीं रह रही हैं। उनके पास अब सन्नाटा नहीं हैं। वे अपनी अभिव्यक्ति को न सिर्फ मुखर कर रही हैं बल्कि कई मामलों में पुरुषों से भी कहीं आगे निकल गई हैं। यह स्थिति विख्यात साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की ज्येष्ठ पुत्री अनीता प्रभाकर की स्मृति में पिछले दो साल से आयोजित की जा रही कहानी प्रतियोगिताओं के नतीजे से स्पष्ट हो रही है। पिछले साल भी अनीता प्रभाकर कहानी प्रतियोगिता में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। इस साल भी उक्त कहानी प्रतियोगिता के लिए देश भर से 187 रचनाकारों ने अपनी अपनी कहानियां प्रेषित की थीं, जिनमें 118 महिलाएं थीं जबकि पुरुषों की संख्या मात्र 69 पर आकर ठहर गईं। प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय और तृतीय सहित 12 सांत्वना पुरस्कारों के विजेताओं में महिलाओं की संख्या दस रही जबकि पुरुष मात्र पांच ही रहे।


विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा आयोजितअनिता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता- 2024 के नतीजे सामने आ गए हैं। जिसकी प्रथम विजेता मेरठ कैंप की पूनम मनु घोषित की गई हैं। निर्णायकों ने इनकी कहानी ‘अभिजीत’ को प्रथम घोषित किया है।
विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री और साहित्यकार अतुल कुमार के मुताबिक प्रतियोगिता में बांसवाड़ा,राजस्थान के भरत चंद्र शर्मा की कहानी ‘निर्जला’ को द्वितीय और इटावा उत्तर प्रदेश के शिव अवतार पाल की कहानी ‘जमींदोज’ को तृतीय घोषित किया गया है। सान्त्वना पुरस्कार के लिए कुल बारह कहानियों का चयन किया गया, जिनमें
1 ‘शब्दजाल'( संगीता माथुर, जोधपुर )2
‘दायरे’ ( शर्मीला चौहान, ठाणे ,महाराष्ट्र)3
‘जाह्नवी’ ( डाॅ लता अग्रवाल, भोपाल), 4
‘तृष्णा’ ( इन्द्रजीत कौर, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल) 5
‘कुलदेवी की सौगंध’ ( नरेश कुमार मौर्य ,बरेली )6
‘मामू,महाराज, मसीहा'( मुख्तार अहमद, दिल्ली )7
‘रिवर्स गियर’ ( रेनू श्रीवास्तव,शहडोल,मध्य प्रदेश) 8
‘पूरे दिन नीलू नीलू’ ( लोकेश गुलियानी, जयपुर ,राजस्थान)9
‘धूमिल सी रेखा’ ( अलका प्रमोद, लखनऊ ,उत्तर प्रदेश) 10
‘बीज सेमल का’ ( उर्मिला शुक्ल, रायपुर , छत्तीसगढ़), 11
‘शगुन’ ( शोभना श्याम, दिल्ली )12
‘टेढ़े पाँव का सफर’ (आशा शर्मा,बीकानेर ,राजस्थान) शामिल हैं। इन सभी विजेताओं को 26 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी के सभागार में अनीता प्रभाकर स्मृति पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा।


अतुल कुमार के मुताबिक
निर्णायक मंडल में निर्देश निधि (बुलंदशहर), सविता मिश्रा, (बिजनौर), विजय कुमार मिश्रा (दिल्ली ), बलराम अग्रवाल (नोएडा) शामिल थे।
अनिता प्रभाकर का जन्म 1940 में हुआ था। वे विख्यात साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की ज्येष्ठ पुत्री थीं और उनका निधन 2022 में 82 साल की उम्र में हो गया। उनके निधन के दूसरे साल में उनकी स्मृति में हिंदी कहानी प्रतियोगिता की शुरुआत की गई। अनीता प्रभाकर ने
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए-हिंदी, बी एड तक की शिक्षा हासिल की थीं। वे स्कूल में हिंदी की शिक्षिका थीं और अध्यापन के साथ लेखन में भी सक्रिय रहीं।

उनकी 2 कहानियों की और 1 कविताओं की पुस्तक प्रकाशित हैं। उनकी 2 कहानियां पुरस्कृत भी हुईं। उनको सरकार की ओर से बेस्ट शिक्षक का सम्मान मिला था। साथ ही संस्कार भारती और अन्य कईं संस्थाओं के साथ जुड़कर साहित्य और समाज सेवा में ताउम्र लगी रहीं।

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