कला और विद्या के बिना मानव जीवन व्यर्थ है
कला और विद्या के बिना मानव जीवन व्यर्थ है
जे टी न्यूज
मनुष्य सृष्टि का सबसे बुद्धिजीवी प्राणी है। और इसी बुद्धि के ही बल पर सभी प्राणियों में श्रेष्ठ भी है। मनुष्य जीवन पर्यंत अपनी जरूरत के हिसाब से अपने ज्ञान और कला कौशलों को निखारता रहता है और अपनी आजीविका का साधन भी बना लेता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि-
“साहित्य -संगीत -कला विहिना,
साक्षात पशु पुच्छ विषाण हीना।।
अर्थात कहने का भाव है कि यदि मनुष्य में साहित्य के प्रति कोई लगाव नहीं है साहित्य की जानकारी नहीं है और उसने कोई कला भी विकसित नहीं की है, न ही वह संगीत में रुचि रखता है तो उसका जीवन व्यर्थ ही है। वह इस धरती पर बिना पूँछ और सींग के पशु ही है। जैसा कि शास्त्रों में भी कहा गया है कि मनुष्य का शरीर अपने आप में एक ब्रह्मांड है और सारी शक्तियां भी इसी में नियत है मनुष्य यदि ठान ली तो कुछ भी संभव नहीं है वह चाहे तो कुछ भी पा सकता है। ज्ञान और बुद्धि सही गलत में अंतर करने और ईश्वर को समझने में सहायक है तो वही कला कौशल जीवन निर्वहन और आजीविका के लिए आवश्यक है। मैंने अक्सर देखा है कि बहुत कम पढ़े-लिखे लोग भी केवल एक हुनर से बहुत अधिक कमा लेते हैं क्योंकि उन्होंने कोई एक विशेष लाइन पकडी होती है जैसे की मैंने देखा कि पर्यटन क्षेत्र में गाइड का काम। एक बार उसने बोलना सीख लिया तो वह बड़े आराम से अच्छा खासा कमाने लगता है। इस तरह कला हमें अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का एक साधन प्रदान करती है, जिससे हम अपने आप को बेहतर बना कर जीवन के उद्देश्य की पूर्ति करते है।

