युद्ध तो खुद एक मसला है,युद्ध किसी मसले का हल क्या देगा आलेख –प्रभुराज नारायण राव
युद्ध तो खुद एक मसला है,युद्ध किसी मसले का हल क्या देगा आलेख –प्रभुराज नारायण राव
जे टी न्यूज
विश्व का सबसे बड़ा। युद्धखोर अमेरिका अपनी विध्वंसक कारवाइयों के लिए शुमार है।उसका चरित्र ही युद्धखोरी का रहा है।यहीं कारण है कि दुनिया दर्जनों देशों को आज भी अपना उपनिवेश बना कर रखा है।सच तो यह है कि वह आतंकवाद का पर्याय है।
दुनिया में जब भी मानवता की रक्षा के लिए युद्ध रोकने की बात हुई है।तो उस युद्ध के पीछे अमेरिका का ही हाथ रहा है और जो उसके पराधीनता को नहीं मानते तो उसकी वजूद को मिटा देता है।जापान के नागासाकी ,हिरोशिमा पर 1945 में परमाणु बम का इस्तेमाल किया था।आज भी बच्चे वहां पैदा होते हैं –लूले ,लंगड़े , काने,बहरे।
आज भी अमेरिका उसी बलिवेदी पर बैठा है।आप जहां भी देखो वह युद्ध के पक्ष में खड़ा दिखता है।वह हथियार का कारोबारी है।इसी उसकी आर्थिक ढांचे को मजबूती मिलती है।आखिर बम तो बम है।वह जब भी चलेगा तो खून ही बहाएगा।फूल तो बरसाएगा नहीं।फिर भी दुनिया की बड़ी हिस्सा आज भी अमेरिका के साथ है।
दुर्भाग्य है कि उसी की कतार में मोदी सरकार भी खड़ी दिखती है।जैसे किसी अपराधी के साथ फोटो खींचा कर कुछ लोग गौरवान्वित होने लगते हैं।उसी तरह नरेंद्र मोदी नमस्ते ट्रंप करा कर गौरवान्वित महसूस करते रहे हैं।
ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आक्रामक बयानबाजी से तनाव और बढ़ रहा है ।पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र युद्ध और अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है।यह बेहद निंदनीय है कि राष्ट्रपति ट्रम्प अब खुलेआम ईरानी नेताओं की हत्या की धमकी दे रहे हैं और ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह यह भी कह रहें हैं कि खुमैनी जहां छिपा है,मुझे मालूम है। मैं जब भी चाहूं उसे मार सकता हूं।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य बेड़े का बड़े पैमाने पर जमावड़ा इस बात का संकेत है कि ईरान पर हमले करने के लिए इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका तैयार है। ये घटनाक्रम खतरनाक हैं और इस क्षेत्र और दुनिया को विनाशकारी युद्ध के कगार पर धकेलने का जोखिम है।
कनाडा में जी-7 की बैठक में दिए गए बयान से इस आक्रामकता को और बढ़ावा मिला है। यह निंदनीय है कि जी-7 ईरान को दोषी ठहराता है और इजरायल की आक्रामक हरकतों पर आंखें मूंद लेता है। यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और चल रही अस्थिरता के लिए मुख्य रूप से इजरायल ही जिम्मेदार है।
गाजा पर अमेरिकी सहयोग से नरसंहारक हमले से शुरू करके, इजरायल ने जान बूझकर सीरिया, लेबनान, यमन और अब ईरान सहित क्षेत्र के अन्य देशों में अपनी सैन्य कार्रवाइयों का विस्तार किया है।उसके इस कारवाई से नरसंहार बढ़ता जा रहा है।क्या इजरायल के इस अमानवीय ,मानव संहारक कारवाइयों पर लगाम लगाए बिना, क्षेत्र में शांति कायम रह सकती है।
अमेरिका और पश्चिमी साम्राज्यवाद, अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन करते हुए, पश्चिम एशिया और उससे आगे अपने आधिपत्य को थोपने के लिए इजराइल का उपयोग कर रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए ।ताकि उनके आक्रामक कार्रवाइयों पर रोक लग सके । भाजपा के नेतृत्व वाली भारतीय सरकार को अपनी अमेरिका समर्थक, इजरायल समर्थक विदेश नीति का रुख त्यागना चाहिए। वैश्विक दक्षिण के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के लिए अन्य देशों के साथ एकजुटता की आवश्यकता है ।ताकि सामूहिक रूप से इजरायल और उसके प्रमुख आका संयुक्त राज्य अमेरिका की आक्रामकता को तत्काल समाप्त करने की मांग को मजबूती मिल सके।



