वोट चोरी चुनाव आयोग और भाजपा का संयुक्त प्रतिफल

वोट चोरी चुनाव आयोग और भाजपा का संयुक्त प्रतिफल

आलेख –प्रभुराज नारायण राव

 

जे टी न्यूज
पिछले लोकसभा चुनाव तथा कई उपचुनावों में चुनाव आयोग पर, उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा होता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अनेक सवाल चुनाव आयुक्त पर उनके निष्पक्षता पर खड़ा किए गए। बल्कि स्पष्ट रूप से यह कहा जाए कि लोकसभा की कैबिनेट ने चुनाव आयुक्त के निर्वाचन की प्रक्रिया में संशोधन करके तीन सदस्यीय कमिटी द्वारा चुनाव आयोग का निर्वाचन किया जाएगा ।उसमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के स्थान पर गृह मंत्री अमित शाह का नाम शामिल कर लिया गया। इस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तीन सदस्यीय कमिटी ने ज्ञानेश कुमार को बहुमत से चुनाव आयुक्त नियुक्त किया ।तब से ही निष्पक्ष चुनाव लगातार संदेह के घेरे में रहा और चुनाव में चुनाव आयोग एक पक्ष कर के रूप में दिखने लगा था ।भारतीय जनता पार्टी का एक हिस्सा नजर आने लगा था और वह आज भी इस मुकाम पर खड़ा है।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित भारत का संविधान आज खतरे में है। केंद्र की सरकार ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान की कोई परवाह नहीं करते और चुनाव आयोग जिस तरीके से मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी की पक्ष में खड़ी दिखती है ।वह निश्चय ही इस जनतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। देश के राष्ट्रपति गंभीरता से इस संविधान विरोधी कार्यों पर ध्यान देकर कारवाई कर सकती थी।लेकिन दुर्भाग्य इस देश का कि राष्ट्रपति भी उसी कतार में चट्टान के साथ खड़ी दिखती है।ऐसी स्थिति में हर जनतंत्र प्रेमी की निगाह माननीय उच्च न्यायालय पर टीका हुआ है।जिसकी जिम्मेदारी संविधान की रक्षा करने का भी है।
कांग्रेस के नेता तथा लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग द्वारा हरियाणा में कराये गए विधान सभा चुनाव में भारी वोट चोरी के मामले को सामने लाया है । यह न केवल चुनाव आयोग की अपनी स्वतंत्र करवाई है। बल्कि भारतीय जनता पार्टी की संलिप्तता भी इसमें शामिल है। राहुल गांधी ने बताया कि विधानसभा चुनाव में जब बैलेट पेपर के द्वारा डाले गए मतों की गिनती हो रही थी। उस समय तक 73 सीटों पर कांग्रेस और 27 सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी। अधिकांश एग्जिट पोल में भी हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत को दिखलाया था। लेकिन जब इ वी एम में डाले गए मतों की गिनती शुरू हुई ।तो उसका रिजल्ट उल्टा दिखने लगा । बल्कि भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत हो गई और कांग्रेस की बुरी तरह पराजय हुई ।तो प्रश्न उठता है कि बैलेट पेपर की गिनती में जब कांग्रेस 73 सीटों पर आगे थी। तो इ वी एम के मतों की गिनती में इतना बड़ा अंतर कैसे हो गया ?


उन्होंने बताया कि दो करोड़ से ज्यादा पड़े हुए मतों में से 25 लाख 41 हजार से ज्यादा मतों की चोरी हुई।यानी इ वी एम से निकले प्रत्येक 8 वोट में से एक वोट चोरी की थी।इसमें से 5 लाख 21 हजार से ज्यादा वोट गलत पत्ते पर पाया गया।
हरियाणा चुनाव में ब्राजील की एक मॉडल ने 10 बूथ पर 22 बार वोट डाला।चेहरा उसका था लेकिन नाम सरस्वती,सीमा,अस्मिता आदि अलग अलग नाम थे। 2 बूथ पर 223 बार एक व्यक्ति का फोटो कहां से आता है।एक बूथ के मकान नंबर 264 में 5 सौ वोटर कहां से आए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनिक ने एक भाषण में कहा था कि हरियाणा विधान सभा का चुनाव हम निश्चित रूप से जीतेंगे ।हमने उसकी सारी व्यवस्थाएं कर रखी है ।आपको चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है। यह बयान चुनाव आयोग और भाजपा की मिली भगत को दर्शाता है ।चुनाव आयोग ने कहा है कि वैसे मतदाता जिनके पास कोई घर नहीं है। जो फुटपाथ पर, सड़क के किनारे ,ओवर ब्रिज के नीचे रहते हैं उन मतदाताओं के मकान का नंबर 0 है।तो 0 नंबर में ऐसे सैकड़ो नाम कहां से आ गए जिनके पास अपना पक्का का मकान है।
राहुल गांधी ने बहुत ही पारदर्शिता के साथ, साक्ष्यों के साथ चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनेक बार चुनाव आयोग के पारदर्शिता पर प्रश्न खड़ा किया है। उसने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष रूप से चुनाव करना है। सभी मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करना है। गलत और मृत मतदाताओं को वोटर लिस्ट से निकलना है और एक सार्वभौम टीम बनाकर चुनाव संपन्न करना है। चुनाव आयोग का काम नागरिकता की पहचान करना नहीं है ।उससे चुनाव आयोग बाज आवे।

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