मेजर जयपाल सिंह को लाल सलाम
मेजर जयपाल सिंह को लाल सलाम

जे टी न्यूज
ब्रिटिश नौसेना के मेजर जयपाल सिंह का आज पुण्यतिथि है।उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के दमन,और अन्याय के खिलाफ सेना के जवानों को गोलबंद करने का काम किया।वे सेना के अंदर ब्रिटिश साम्राज्यवाद और गुलामी से मुक्ति के लिए सेना के अंदर स्वतंत्र भारत के लिए जज्बा भरने का काम किया।1941 में वे सेना के अफसर बन गए।वे अंग्रेजों के खिलाफ आंतरिक लड़ाई के लिए सेना के अफसरों की एक गुप्त संगठन बनाई।जिसका नाम काउंसिल ऑफ एक्शन था।
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय 3 हजार से ज्यादा हथियार क्रांतिकारियों को भेजा।1946 में नौसेना विद्रोह की मुख्य भूमिका में वे थे।जिसका कांग्रेस द्वारा विरोध करने पर वे निराश हो गए थे।इसी दौरान ब्रिटिश हुकूमत का उन्हें गुप्त दस्तावेज मिला।जिसका कोड नाम ऑपरेशन असायलम था।जिसका मकसद राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े नेताओं की हत्या करना था।मेजर जयपाल सिंह भारी खतरा लेते हुए इसकी जानकारी कांग्रेस ,समाजवादियों और कम्युनिस्टों को दी।जिस पर कांग्रेस और सोशलिस्टों ने कोई ध्यान नहीं दिया।लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी और रिवॉल्यूशनरी काउंसिल ऑफ एक्शन ने इसे प्रकाशित कर दिया।जिसके चलते सेना से मेजर जयपाल सिंह को भागना पड़ा था।वरना कोर्ट मार्शल कर के उन्हें गोली मार दिया जाता।इस आरोप में 3 सितंबर 47 को इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।लेकिन नेहरू सरकार ने उन्हें बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया।इस तरह एक साल तक उन्हें फोर्ट विलियन जेल में रहना पड़ा।वे अपने 10 वर्षों के भूमिगत जीवन में बंगाल के किसानों के संघर्ष,तेलंगाना निजाम के खिलाफ हथिया बंद संघर्ष,पांडिचेरी में फ्रांसीसी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष,मणिपुर में आदिवासियों के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका की।1956 में भूमिगत जीवन से निकलने के बाद,1970 में उन्हें पुराने केसों में फिर जेल में डाल दिया गया।

1975 में आपातकाल में वे जेल में रहे।1981 में एस एफ आई के मुरैना म प्र के क्लास में वे हमें शिक्षा दिए हैं।आज उनके पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन और क्रांतिकारी सलाम।



