सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रो. राजेंद्र प्रसाद के निधन पर शोक
सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रो. राजेंद्र प्रसाद के निधन पर शोक

जे टी न्यूज, मधेपुरा: अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के संयुक्त सचिव एवं भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू), मधेपुरा के सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दार्शनिक प्रो. राजेंद्र प्रसाद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय दर्शन जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।
डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि प्रो. राजेंद्र प्रसाद भारतीय दर्शन के ऐसे विद्वान थे, जिन्होंने अपने ज्ञान, शोध और लेखन से देश-विदेश में विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा पटना विश्वविद्यालय से प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई मिशिगन विश्वविद्यालय (अमेरिका) से पूरी की। बाद में वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर में दर्शनशास्त्र के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रहे।
उन्होंने बताया कि प्रो. प्रसाद फुलब्राइट फेलो, रॉकफेलर फाउंडेशन फेलो तथा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) के राष्ट्रीय फेलो भी रहे। इसके अलावा उन्होंने अखिल भारतीय दर्शन परिषद एवं भारतीय दार्शनिक कांग्रेस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहकर दर्शनशास्त्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।
डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि प्रो. राजेंद्र प्रसाद की अनेक पुस्तकें आज भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी चर्चित पुस्तक ‘दर्शन शास्त्र की रूपरेखा’ देशभर के विद्यार्थियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रही है। उन्होंने बताया कि स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने स्वयं भी इस पुस्तक का अध्ययन किया था, जिससे उन्हें दर्शनशास्त्र को समझने में काफी सहायता मिली।
उन्होंने भावुक होकर स्मरण किया कि उन्हें एक बार लखनऊ में आयोजित एक शैक्षणिक कार्यक्रम में प्रो. राजेंद्र प्रसाद का प्रत्यक्ष व्याख्यान सुनने का अवसर मिला था। उनके विचारों की गहराई, सरल अभिव्यक्ति और विषय पर अद्भुत पकड़ आज भी प्रेरणादायी है।
डॉ. सुधांशु शेखर ने दिवंगत प्रो. राजेंद्र प्रसाद को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों, शिष्यों और शुभचिंतकों को इस दुखद क्षति को सहन करने की शक्ति दें।
