मत मारो, मारो मत ::अपनी ईमान

मत मारो, मारो मत ::अपनी ईमान

 

जे टी न्यूज
कुदरत का महावरदान
महानतम मानव
जिसे बनाया कुदरत ने बड़े सोच समझ कर
अपने सामान ही
सब कुछ दिया जैसे
ज्ञान विवेक और क्षमता
प्रकृति की सबसे
दिमागदार के जीव
आखिर क्यों वह अपने आप को
जानवर से भी बदतर
बर्वर
बनता जा रहा है अपने को
आखिर संस्कार और समझ कहां जा रहा है
क्यों संस्कृति और सभ्यता को खंजर भूख करो लहू लुहान किया जा रहा है
होती तार तार सभ्यता की
कौन जंबो वार है इसके
मत घोटो रिश्ते का गला
खोलो मेरे भाई
अपनी समझ का ताला
मत भूख अपनी संस्कार और समझ को भला!
हां संस्कार और समझ को भला!!
डॉ रंजीत कुमार दिनकर

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