भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित व्याख्यान में शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण पर हुआ मंथन
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित व्याख्यान में शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण पर हुआ मंथन

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जे टी न्यूज, बिरसिंहपुर, समस्तीपुर:
संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, बिरसिंहपुर (स्वायत्त उच्च शिक्षण संस्थान, नैक बी प्लस प्लस) में “इंट्रोडक्शन तो इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस): दर्शनशास्त्र , स्कोप एंड रिलीवेंस” विषय पर एक प्रेरणादायी शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की दार्शनिक पृष्ठभूमि, व्यापक स्वरूप तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता से परिचित कराना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण का सशक्त आधार है। शिक्षक शिक्षा में भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुमेश नारायण सिंह, विभागाध्यक्ष (बी.एड़.), एच.आर.पी.जी. कॉलेज , एस.के.यू (सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी), सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित, दर्शन एवं गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा समग्र मानव विकास, नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता तथा वैश्विक कल्याण का संदेश देती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं का आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षण विधियों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करें।
व्याख्यान के दौरान भारतीय संस्कृति, ज्ञान, धर्म, संस्कार, समन्वय तथा समग्र विकास जैसे विषयों पर भी सारगर्भित चर्चा हुई। प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया।
अंत में प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम शिक्षक-प्रशिक्षुओं में शोध, नवाचार तथा भारतीय मूल्यों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्याख्यान प्रशिक्षुओं के बौद्धिक एवं व्यावसायिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बी.एड./डी.एल.एड. के सभी प्रशिक्षु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
