संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न प्रभुराज नारायण राव
संयुक्त किसान मोर्चा का राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न
प्रभुराज नारायण राव
जे टी न्यूज़
संयुक्त किसान मोर्चा के घोषणा पत्र के प्रारूप को अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय वित्त सचिव पी कृष्णा प्रसाद ने सम्मेलन के पटल पर रखा।संयुक्त किसान मोर्चा के अखिल भारतीय सम्मेलन में देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसान संगठनों तथा सबसे बड़ा साझा मंच के प्रतिनिधि शामिल हुए ।उन्होंने बताया कि नवंबर 2020 में दिल्ली की सभी बॉर्डर पर हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में संयुक्त किसान मोर्चा का गठन हुआ था ।385 दिनों तक दिन रात चले इस शांतिपूर्ण महापड़ाव में हमारे 736 महत्वपूर्ण किसानों ने शहादत दी थी। संयुक्त किसान मोर्चा सभी फसलों की एम एस पी की गारंटी के साथ सीटू+ 50% के आधार पर एम एस पी को कानूनी दर्ज देने, किसानों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए कर्ज माफी तथा बिजली के निजीकरण को रोकने के लिए लगातार संघर्ष करता रहा है ।2020-21 का महान किसान आंदोलन जो देश की आजादी के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन का रूप लिया था ।19 नवंबर 2021 को तीनों कृषि कानूनों की वापसी प्रधानमंत्री द्वारा करना एक ऐतिहासिक जीत थी ।11 दिसंबर 2021 को 9 दिसंबर 2021 के केंद्र सरकार के लिखित आश्वासन के आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था ।इस आश्वासन में सभी फसलों के लिए खरीद की गारंटी के साथ-साथ सीटू +50% एमएससी पर समिति गठन करने,व्यापक कर्ज माफी, बिजली सत्र से सुधार न करने तथा किसानों पर दर्ज सभी मुकदमें वापस लेने का वादा किया गया था। लेकिन 5 साल गुजर जाने के बाद भी नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसी भी आश्वासन को लागू नहीं किया। जबकि किसान विरोधी नीतियों को बदलने तथा कृषि और देश को बचाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा लगातार संघर्ष के रास्ते पर डटा हुआ है।12 वर्षों से सत्ता में रहने के दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार किसान समुदाय के साथ लगातार विश्वासघात किया ।एमएसपी को कानूनी दर्जा देने से मुकरती रही। खेती में लगातार बढ़ती लागत को कम करने से इंकार करती रही है ।गरीब और मध्यम किसानों, बटाईदार किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए व्यापक केंद्रीय कर्ज माफी देने से भी सरकार इंकार करती रही है। दूसरी ओर लगभग 16 लाख करोड रुपए कॉरपोरेट के ऋण माफी के लिए दिए गए ।केंद्र सरकार के कॉरपोरेट समर्थित नीतियों के चलते मुट्ठी भर अमीर और विशाल किसान तथा मेहनतकश आबादी के बीच असमानता लगातार बढ़ती जा रही है। देश में एक प्रतिशत अमीर की आबादी को कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। जबकि 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 60% हिस्सा है। ठीक इसके विपरीत 50% लोगों को राष्ट्रीय आय का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। 2019 में भारत के अरबपतियों की कुल संपत्ति लगभग 31 लाख करोड रुपए थी। जो 2025 में बढ़ कर 88 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
भारत अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता (एफडीए) भारत के आर्थिक उपनिवेशीकरण का एक खाका है ।कृषि के क्षेत्र में यह समझौते सस्ते कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा देंगे। खेती की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेंगे। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर कॉर्पोरेट कब्जा को मजबूत करेंगे तथा फसल चक्र में ऐसे बदलाव लाएंगे ,जो देश की खाद्य आत्मनिर्भरता को गंभीर नुकसान पहुंचायेगा ।किसान विरोधी अर्थव्यवस्था पर कॉर्पोरेट कब्जे का डट कर विरोध करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा प्रतिबद्ध है।
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 16 फरवरी 2026 को देश भर के किसानों ने यह संकल्प लिया कि 9 दिसंबर 2021 को मोदी सरकार द्वारा लिखित रूप में दिए गए सभी आश्वासनों को लागू करवाने तक देशव्यापी व्यापक आंदोलन चलाएगा।
हमने 7 प्रमुख मांगो के लिए संघर्ष का निर्णय लिया है। भारत अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता को वापस लेने, सभी मुक्त व्यापार समझौता को रद्द करने, सभी फसलों के लिए खरीद की गारंटी के साथ सीटू+ प्लस 50% एमएसपी को कानूनी अधिकार देने ,किसानों तथा ग्रामीण मजदूरों की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए व्यापक रूप में किसानों को कर्ज मुक्त करने, किसान आत्महत्या वाले प्रत्येक परिवार को 25 लाख का मुआवजा देने ,चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सभी श्रमिकों के लिए 31000 रुपए प्रति माह न्यूनतम वेतन देने ,मनरेगा को बहाल कर वर्ष में 200 दिन का रोजगार देने और 700 प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने, बिजली निजीकरण विधेयक 2025 बीज विधेयक 2025 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक को वापस लेने ,भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट परस्त भूमि पुलिंग पर रोक लगाने तथा राज्य स्तरीय प्रमुख मांगों को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया गया।

संयुक्त किसान मोर्चा 10 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन की 84 में वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में 1000 स्थान पर जेल भरो रेल ब्रो को सलाखों को सहित विभिन्न प्रतिरोध कार्यक्रम आयोजित करेगी। राष्ट्र विरोधी मुक्त व्यापार समझौता को वापस लेने तथा अन्य प्रमुख मांगों के समर्थन में अन्य जन संगठनों के साथ मिलकर यह कार्य करेगी। 17 अगस्त 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री लोकसभा में विपक्ष के नेता तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री विधानसभाओं में विपक्ष के नेताओं सांसदों तथा विधायकों को मांग पत्र सौंप का और साथ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग करेगा। सभी किसान संगठन स्वतंत्रता संयुक्त रूप से जनपद यात्राएं वहां में हत्या यात्रा ट्रैक्टर मार्च आयोजित करेंगे तथा महापंचायत को जनसभाओं में इसका समापन करेंगे 3 अक्टूबर लखीमपुर खीरी शहीद दिवस के अवसर पर पूरे देश में गांव में पंचायत आयोजित करें जी 26 नवंबर 2026 को देश की राजधानी दिल्ली सहित देशभक्ति के एक सौ स्थान पर किसान मार्च और कई दिनों तक चलने वाले व्यापक जन आंदोलन खड़ा करेंगे जिनकी तिथियां बाद में तय की जाएगी।
