उर्दू-बांग्ला स्पेशल शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार : आलोक कुमार मेहता

पूर्व सहकारिता मंत्री ने मुख्यमंत्री से की छह मांगें सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और सेवा समाप्ति पर रोक लगाने का आग्रह

उर्दू-बांग्ला स्पेशल शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार : आलोक कुमार मेहता
पूर्व सहकारिता मंत्री ने मुख्यमंत्री से की छह मांगें
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और सेवा समाप्ति पर रोक लगाने का आग्रह

जे टी न्यूज, समस्तीपुर, 19 अक्टूबर २०२६ :उजियारपुर के विधायक एवं बिहार के पूर्व सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता ने बिहार के हजारों उर्दू-बांग्ला स्पेशल नियोजित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार से शिक्षकों के हित में तत्काल ठोस कदम उठाने और उनकी सेवा समाप्ति की आशंकाओं को दूर करने की मांग की है।

आलोक कुमार मेहता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 28 जुलाई 2026 के आदेश तथा प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्र संख्या-2853, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 के बाद बिहार के हजारों नियोजित शिक्षकों की सेवा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में प्रभावित शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर तत्काल पहल करनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में वर्ष 2015-16 के दौरान नियुक्त उर्दू एवं बांग्ला स्पेशल शिक्षकों का नियोजन किसी नई प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ था, बल्कि उसी प्रक्रिया के क्रम में न्यायिक आदेशों और विभागीय निर्देशों के अनुपालन में किया गया था। इसलिए इन शिक्षकों के मामले पर अलग से विचार किया जाना चाहिए।

सरकार के सामने रखीं छह प्रमुख मांगें

पूर्व सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता ने राज्य सरकार से छह मांगें की हैं—

1. सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका: राज्य सरकार अविलंब सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे।

2. शिक्षकों को राहत: वर्ष 2014 की नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में नियुक्त उर्दू-बांग्ला स्पेशल शिक्षकों को अलग श्रेणी में रखते हुए उनकी सेवा समाप्ति पर रोक लगाई जाए।

3. वर्तमान पदों पर संरक्षण: बाद में डीएलएड, सक्षमता परीक्षा अथवा बीपीएससी के माध्यम से वर्तमान पदों पर नियुक्त हो चुके शिक्षकों को उनकी वर्तमान योग्यता के आधार पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।

4. अभिलेख गायब होने की जवाबदेही: नियोजन संबंधी अभिलेखों के गायब होने के मामले में संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और इसके लिए शिक्षकों को दंडित नहीं किया जाए।

5. जिलों को स्पष्ट निर्देश: पुनर्विचार याचिका पर निर्णय आने तक वेतन रोकने, सेवा समाप्त करने अथवा बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई नहीं करने के संबंध में सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।

6. नियमावली में संशोधन: शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नियमावली संशोधन अथवा अन्य वैधानिक उपाय किए जाएं।

आलोक कुमार मेहता ने कहा कि हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य इस मामले से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेते हुए प्रभावित शिक्षकों को उचित राहत प्रदान करनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए, ताकि शिक्षकों के बीच व्याप्त असमंजस दूर हो और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाए जा सकें।

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