प्रकाश पर्व: कंगन घाट सज धज कर तैयार, डीएम एसपी ने लिया तैयारी का जायजा

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प्रकाश पर्व: कंगन घाट सज धज कर तैयार, डीएम एसपी ने लिया तैयारी का जायजा

छपरा : सारण के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन तथा पुलिस अधीक्षक हरकिशोर राय ने प्रकाशोत्सव को लेकर कंगन घाट पर बनाये गये टेंट सिटी का गुरूवार की शाम को निरीक्षण किया और तैयारी का जायजा लिया। प्रशासन के स्तर से की गई तैयारियों का जायजा लिया। यहां सिख समुदाय के इस बार करीब 15 से 20 लाख सिख तीर्थयात्रियों के प्रकाशोत्सव में पहुंचने की उम्मीद है। तख्त हरिमंदिर के बाद कंगन घाट सिख धर्मावलंबियों के लिए आस्था का केंद्र है। कंगन घाट सारण जिले के में है। प्रकाशोत्सव के लिए कंगन घाट खासतौर सज-धज कर लगभग तैयार हो चुका है। 40 एकड़ जमीन पर टेंट सिटी का निर्माण का काम पूरा हो चुका है। बचे हुए काम युद्धस्तर पर चल रहे हैं। पाथवे का निर्माण भी पूरा हो चुका है। डीएम व एसपी व जिलास्तरीय अफसर चल रही तैयारियों पर नजर रख रहे हैं।
टेंट सिटी में सिख तीर्थ यात्रियों के अलावा अफसर, पुलिस पदाधिकारी व महिला पुलिस पदाधिकारी के आवासन की व्यवस्था की गयी है । इसके लिए अलग-अलग ब्लॉक होगा।प्रशासनिक स्तर पर बताया गया कि कंगन घाट पर घटका दौड़ इस बार भी आकर्षण का केंद्र होगा। दौड़ के अलावा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए गैलरी का निर्माण कराया गया है। पुलिस बल के ठहरने के लिए अतिरिक्त टेंट सिटी बनाया गया है। इसके अलावा घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग कर दी गई है। इस बार श्रद्धालुओं के स्नान के लिए खास व्यवस्था की जा रही है। पर्यटन विभाग द्वारा कंगन घाट से लेकर दानापुर स्थित हांडी साहिब गुरुद्वारा तक कई पानी वाले जहाज के अलावा मोटरबोट, नौकाएं चलाई जाएगी। घाट पर लंगर की वृहत व्यवस्था होगी।

कंगन घाट का यह है महत्व

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना सिटी है। तख्त हरिमंदिर साहिब में मत्था टेकने के बाद सिख धर्मावलंबी गंगा तट के ‘’कंगन घाट’’ जाना नहीं भूलते। मान्यता है कि बचपन में खेलने के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी का एक कंगन नदी में गुम हो गया था। गुरुजी की मां माता गुजरी ने एक हाथ के कंगन के बारे में पूछा तो, उन्होंने दूसरे हाथ का भी कंगन उतारकर पानी में फेंक दिया। किवदंती है कि इसके बाद जो कोई भी गंगा में कंगन ढूंढ़ने जाता उसे कंगन मिलता रहा।

कंगन घाट की यह भी खासियत

कंगनघाट की एक अहम विशेषता यह भी है कि इसका एरिया तीन जिलों की सीमाओं में पड़ता है। घाट का बड़ा हिस्सा सारण जिले के सोनपुर अंचल में है । इसके अलावा वैशाली जिले के जहांगीरपुर पंचायत के सुकुमारपुर राजस्व गांव और वार्ड नंबर एक में आता है तो, कुछ हिस्सा पटना जिले में आता है। मुख्य आयोजन स्थल सारण जिले की सीमा में आता है।

कहते हैं गुरु साहेब की माताजी मां गुजरी के पूर्वजों का प्राचीन पाटलीपुत्र से लेकर इस पार वर्तमान राघोपुर के इलाका पर स्वामित्व कायम था। गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों जोड़ावर सिंह के नाम पर जुड़ावनपुर व फतेह सिंह के नाम पर बसा फतेहपुर गांव इस बात का उदाहरण है। सूबे की वर्तमान सरकार झारखंड बंटवारे के बाद बिहार की खाली झोली भरने की दिशा में धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं वाले क्षेत्र को विकसित करने की बात जरूर करती है, परंतु इस दिशा में ठोस प्रयास न के बराबर हो रहा है। प्रकाशोत्सव के जरिये सरकार सिख धर्मावलंबियों का जरूर ध्यान खींचा है पर यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है। गुरु गोविंद से संबद्ध राघोपुर के इन दो पौराणिक गांवों के विषय में ज्यादातर सिख धर्मावलंबियों तक को पता नहीं। इतना ही नहीं लालगंज स्थित नानकशाही गुरुद्वारा भी उपेक्षित है। प्रकाशोत्सव के दौरान यहां सिख श्रद्धालु नहीं आते। गौरतलब होगा कि नानकशाही गुरुद्वारा उस जगह पर बना है जहां सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक साहेब आए थे। नानकशाही गुरुद्धारा की स्थापना नानक के पुत्र ने की थी।

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