यही हैं पाठक जी

यही हैं पाठक जी !


जे टी न्यूज़
सच पूछिए तो ये दोनों गुरु चेला अतिउत्साह में हैं।गुरु चेला मतलब ! नीतीश जी और पाठक जी।दोनों का प्रदर्शन एक के बाद दिगरे हो ही रहा है।गुदगुदाने और भड़काने वाला भी।पूरा बिहार देख भी रहा है आनन्द के साथ।।एक हैं जो शिक्षा से जनसंख्या कैसे कनट्रोल होता है।थ्युरी बताते बताते प्रैक्टिकल भी समझाने लगते है।तो दूसरे, शैक्षणिक वातावरण को सुधारते सुधारते बेचारे शिक्षकों को कोल्हू का बैल बनाने पर तुले हुए हैं।नयी पीढी के युवा कोल्हू शायद नहीं देखे होगे।तेलहन पेड़ कर तेल निकालने वाला मशीन जो बैल के सहारे चलता था।उस बैल को दिन भर गोलाकार धूरी में ही घूमना होता था।दूसरी जगह जाने की अनुमति नहीं थी।हाँ उसके मुँह में जाब भी लगा दिया जाता था। मतलब दिन भर घुमते रहो, बोलना गुनाह है। फरमान है- केवल बच्चों को पढा़ना है, न आप संगठन बना सकते हो, न किसी संगठन का सदस्य बन सकते हो, सोशल मिडिया पर आना अनुशासनहीनता और हड़ताल में जाना दंडनीय अपराध।पाठक जी अनुशासन की गाडी़ इतना तेज चला रहे हैं कि उन्हें समतल और गढ्ढा सभी एक समान दिखाई देता है।कोई तो बता दे पाठक को, कि हर नागरिक को संगठन बनाने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करने का अधिकार भारत के संविधान का एक अहम हिस्सा है। ये बात सही है कि पिछले दिनों शैक्षणिक अराजकता बिहार के शिक्षा को दिमक की तरह खाये जा रहा था।आप उसे दुरुस्त करना चाहते हैं , इसके लिये आपकी प्रशंसा भी हो रही है।लेकिन शिक्षकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का अधिकार आपको किसने दे दिया ?नीतिश जी के लाडले हैं आप, यह हर कोई जानता है।गाँधी मैदान में आपका नाम ले लेकर वो पूरा गद गद भी थे।बिहार में शैक्षणिक वातावरण की गुणवत्ता बुलंद हो इसका समर्थन भला कौन नहीं करेगा ? पर कार्यशैली और नियमावली या आदेश यदि अलोकतांत्रिक हो तो फिर यह सवाल भी पूछा जायेगा कि आप अफसरशाह हैं या तानाशाह।मजदूर वर्ग के आक्रोश का ज्वारभाटा बडा़ ही भीषण होता है।ये गैर लोकतांत्रिक रवैया उसी को आमंत्रित कर रहा है।

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