श्रीकृष्ण चेतना मंच दरभंगा के तत्वाधान में एक विमर्श आयोजित

श्रीकृष्ण चेतना मंच दरभंगा के तत्वाधान में एक विमर्श आयोजित


जे टी न्यूज
श्रीकृष्ण चेतना मंच दरभंगा के तत्वाधान में एक विमर्श आयोजित की गई इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर देव नारायण यादव पूर्व निदेशक शिक्षा विभाग ने की, वहीं मंच संचालन राम बुझावन यादव ने किया। कार्यक्रम के उद्घाटन श्री रमण पूर्व वीसी, बीएन मंडल विश्वविद्यालय ने किया।
मुख्य अतिथि श्री गोरेलाल यादव पूर्व आईएएस ने देश की जनता के आमदनी दिन-प्रतिदिन कमी होने के कारण सरकार के गलत आर्थिक नीति के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाले।
मुख्य वक्ता श्री नवीन कुमार संपादक आर्टिकल -19 दिल्ली ने कहा कि संविधान सपथ्य लेकर सत्ता में बैठी बीजेपी सरकार ने हरेक काम संवैधानिक कानून के विपरित कर रही है। शिक्षा, रोजगार, स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारें छिनती जा रही है। हम भारत के लोगों को एकजुट होकर संविधान विरोधी सरकार के खिलाफ गोलबंद हो कर मुकाबला करने की आवश्यकता है। नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ियां गुलामी की जंजीरों में बंध जायेंगे।
प्रो सेफालिका शेखर पूर्व उपाध्यक्ष छात्र संघ जेएनयू दिल्ली ने कहा हमें अपनी आजादी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने केलिए एकजुट होकर सड़क पर आने की आवश्यकता है। माता बहन को पाखंडी व्यवस्था से दूर रहकर उच्च शिक्षा की ओर अधिक से अधिक अपने बच्ची बच्चों को हासिल कराने पर तन-मन-धन के साथ लगे रहे।


, प्रोफेसर मुनेश्वर यादव राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष मिथिला विश्वविद्यालय ने कहा कि आजादी मिलने के बाद भारत में बड़े ही तेजी से सरकार में रहने वाले लोगों ने सार्वजनिक कल-कारखाने लगा के एक तरफ देश की आवश्यकता अनुसार निर्माण किया । वहीं दूसरी ओर लोगों के लिए रोजी-रोटी, नौकरी, व्यवसाय आदि का अवसर को बढ़ाया। लेकिन पिछले दस वर्षों में फासिस्टवादी बीजेपी आरएसएस की सरकार ने सभी सार्वजनिक सेक्टर के उद्योगों को लूट-खसोट कर कमजोर कर दिया और निजी हाथों बेच कर युवाओं, नौजवानों की नौकरी, रोजगार, व्यवसाय सभी छिन लिया है। इसे बचाने के लिए सामाजिक न्याय वर्ग के लोगों को विशुद्ध समाजवादी विचारधारा को अंगीकार करना होगा, तभी हम फासिस्टवादी, साम्प्रदायिक, झूठ-फरेब, हिंसावादी बीजेपी से सामना कर पायेंगे।
प्रोफेसर विजय कुमार यादव अर्थशास्त्र विभाग मिथिला विश्वविद्यालय ने भी अपनी आर्थिक सामाजिक शैक्षणिक, वैचारिक बल को बढ़ाने पर जोर दिया।

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