मृतक एआई अभियंता अतुल सुभाष के आखिरी शब्द: यदि अदालत, भ्रष्ट महिला जज, मेरी पत्नी व उसके परिजनों को बरी कर दें तो मेरी अस्थियां कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना, फोटो परिजन के साथ मृतक अतुल का ओईनी स्थित घर और फाईल चित्र।

मृतक एआई अभियंता अतुल सुभाष के आखिरी शब्द: यदि अदालत, भ्रष्ट महिला जज, मेरी पत्नी व उसके परिजनों को बरी कर दें तो मेरी अस्थियां कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना,
फोटो परिजन के साथ मृतक अतुल का ओईनी स्थित घर और फाईल चित्र।


समस्तीपुर/ओईनी। देश की आधी आबादी कही जाने वाली महिलाओं को वोट बैंक बदलने की फिराक में सरकार द्वारा महिलाओं के हित में लाये गये कानून का साईड इफेक्ट इन दिनो जोरदार तरीके से सुर्खियों में है। सरकार के इस कानून का सहारा ले कर लडकियां पुलिस की मदद से लड़कों को आत्महत्या करने केलिए विवश करने की हद तक प्रताडित करती हैं यह तथ्य पुलिस पदाधिकारी से लेकर न्यायिक पदाधिकारी तक जानते हैं, कई बार विभिन्न अदालतों द्वारा इस कानून के दुरूपयोग के प्रति टिप्पणी की जाती रही है मगर उस पर कभी न ध्यान देने की जरूरत समझी गई न हीं इस कानून पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की गई। किन्तु रविवार की देर रात बंगलूरू में एआई इंजीनियर अतुल सुभाष के आत्महत्या ने पदाधिकारियों से लेकर सर्वाेच्च न्यायालय तक को इस कानून के गंभीर दुष्परिणाम की ओर आकर्षित कर इस कानून पर विचार करने केलिए बाध्य कर दिया है। लोग किन हालातों व किन मजबूरियों में जिन्दगी की जंग में हार मान कर मौत को गले लगाते हैं इसे महसूस करने के लिए बेंगलुरू में काम कर रहे 34 साल के एआई टक्नोलाॅजी इंजीनियर अतुल सुभाष का 24 पेज का सुसाइड नोट और एक घंटे का वीडियो काफी है।

जिसमें उन्होंने पारिवारिक कलह और कानूनी लड़ाई में हो रही मानसिक प्रताड़ता का दर्द बयां कर आत्महत्या कर ली है। अपने नोट और वीडियो में उन्होंने इसके लिए पत्नी निकिता सिंघानिया, सास, साले और चचेरे ससुर को जिम्मेदार बताया है। सुसाइड नोट में दिवंगत युवा अभियंता ने न्यायिक सिस्टम में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए महिलाओं के प्रति कानून की नर्म दिली, अपनी बेवसी और अपनी आखिरी इच्छा भी लिखी है। बंगलूरू के एक सॉफ्टवेयर कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डीजीएम जिले के ओईनी बाजार (वैनी) निवासी समाजसेवी व व्यवसायी पवन कुमार मोदी के भतीजे तथा ओईनी बाजार के प्रमुख व्यवसायी बजरंगी अग्रवाल ने अपने चचेरे भाई अतुल के नेाट और वीडयो के हवाले से संवाददाता को बताया कि सोशल साईट शादी डाॅट काॅम के जरिए करीब आयी और 2019 में अतुल की पत्नी बनी जौनपुर निवासी निकिता सिंघानिया सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जबकि अतुल सुभाष बी.टेक इन कंप्यूटर साइंस, एमबीए फाइनेंस और एआई इंजीनियरिंग कंसल्टेंट है। शादी के बाद महज चार – पांच दिन दोनो पति-पत्नी साथ रहे, कुछ दिन सब कुछ ठीक ठाक रहा, उसके बाद से ही निकिता और उसके मायके वाले नित नये नये बहाने बना कर उससे पैसे ऐंठने लगे।

नकिता हर पूजा या आयोजन में 6 महंगी साड़ियां और एक गोल्ड सेट मांगती थी। अपनी सास को उसने 20लाख रूपये से अधिक दिए थे, जो उनलोगों ने कभी लौटाया नहीं। यहां बता दें कि मुख्य आरोपी निकिता भी अच्छे पैकेज पर एक एमएनसी में नौकरी करती हैं। एक बार पैसे दे देने के बाद उनका लालच बढ गया और आये दिन डिमांड करने लगे। एक बार दिए गये पैसे लौटाने केलिए कहने और उनकी मांग के अनुसार रूपये न देने पर एक नियमित अंतराल पर एक के बाद एक दहेज प्रताडना, घरेलू हिंसा सहित नौ केस लाद दिए गए। श्री अग्रवाल ने बताया कि दोनों पति पत्नी बंगलूरू में कार्यरत हैं मगर सिर्फ अतुल सुभाष को प्रताडित करने केलिए सारे केस जौनपुर में दर्ज किए गये। एक साल में कुल 23 छुट्टियां दी जाती है मगर 9 मुकदमो की एक साल में 120 सुनवाई हुई और अतुल को 40 बार बेंगलुरु से जौनपुर की अदालत में पेश होना पडा। इस दरम्यान जज की ओर से 3 करोड़ रु. में मामला सेटल करने का दबाव बनाया जाता रहा, और इसकेलिए भी पांच लाख रु. की मांग भी की गई। उपर से हर पेशी पर रिश्वत देनी पड़ती थी सो अलग। इस प्रताडना से तंग आ कर जब सुभाष ने सेटलमेंट से मना किया तो जज ने उसे पक्ष रखने का मौका दिए बगैर ही 16 पेज का आदेश थमा दिया और कहा- पत्नी को 80 हजार रुपये प्रतिमाह दो। जबकि अदालत में तलाक सहित विभिन्न मामलों की प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद 40 हजार रूपये हर महीने दे रहा था। बहरहाल अतुल की मौत पर जार-जार बिलखते माता-पिता ने अपने पुत्र की मौत को हत्या करार देते हुए बंगलूरू पुलिस से न्याय की मांग की है।

वहीं अतुल ने अपने नोट और वीडियो में कहा है कि मेरे बेटे की कस्टडी मेरे माता पिता को दी जाय, मेरे मृत शरीर के पास पत्नी और उसके परिवार को न आने दें और जब तक मुझे प्रताड़ित करने वालों को सजा न मिले, तब तक मेरी अस्थियां विसर्जित न की जाय।यदि अदालत, भ्रष्ट जज, मेरी पत्नी व उसके परिजनों को बरी कर दें तो मेरी अस्थियां कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना। श्री अग्रवाल ने कहा कि अतुल के आखिरी शब्द उसकी पूरी कहानी को बयान करने केलिए काफी है। हमें देश के कानून और न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और पूरा विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा।

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