दिवालिया होता भारत !!!!
दिवालिया होता भारत !!!!

जे टी न्यूज
हालांकि मैं कांग्रेस का घोर विरोधी रहा हूँ, खासकर पीढी आधारित गांधी परिवार से. पूरी जिंदगी कभी भी कांग्रेस को वोट नहीं दिया.
लेकिन साथ ही ये भी सत्य है कि मैं मनमोहन सिह की अर्थव्यवस्था का दीवाना रहा हूँ क्योंकि मैं स्वयम पेशे से अर्थशाष्त्र से जुडा हुआ हूँ.
आज पूरी दुनियाँ के परस्पर सम्बंध सेना-हथियार आधारित नहीं रह गये, धर्म आधारित भी नहीं, बल्कि अर्थ आधारित हो चुके हैं.
सभी देश के शासक अर्थशाष्त्र से जुडे हुए होते जा रहे हैं, या फिर सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय वित्तमंत्री का ही होता है.
जिस समय पूरी दुनियाँ महामंदी की मार झेल रही थी, तेल के दाम आसमान छू रहे थे, उस समय मनमोहन सिंह ने दुनियाँ के सामने बेहद सीमित साधनो के बावजूद बेहतरीन अर्थव्यवस्था चलाने के लिये एक मिसाल पेश की थी, जिसकी पूरी दुनियाँ आज भी सराहना करती है.
मनमोहन राज में मिडल क्लास का एक बडा तबका बेहद ही तेजी से उभरा था. सारी दुनियाँ की कम्पनियाँ हमारे इन नये उपभोक्ताओँ को माल बेचने के लिये लार टपकाने लगी थी, होड लगी थी. हम चीन से बराबरी करने के लिये उसे टक्कर दे रहे थे.
और इस विकास को और निरंतर गति से आगे बढते चले जाना था.
पर 2014 में कांग्रेस को जनता ने इसीलिये नकारा था क्योंकि बीजेपी ने छाती ठोंक कर दावा किया था कि वह जनहितकारी, बेहतर, बहुत अच्छी अर्थव्यवस्था देंगे.
“अच्छे दिन आयंगे” का नारा” जबर्दस्त हिट हुआ था. विदेशी काला धन वापस लाने, पेट्रोल-घरेलू गैस आदि के दाम कम करने, भ्रष्टाचार खत्म करने और नये रोजगार पैदा करने का पूरा-पूरा भरोसा जनता को दिलाया गया था.
इसीसे प्रभावित होकर 2014 और 2019 में स्वयँ मैने और मेरे पूरे परिवार ने भी बीजेपी को वोट दिया था.
लेकिन अब मेरा सवाल:-
2014 से अब तक रोजगार बढे हैं या घटे हैं? अर्थव्यवस्था और तेजी से उभरी है….या डूब चुकी है, नवरत्न कम्पनियां धडाधड बेच डालने के बावजूद सरकार पर इतना बड़ा ऋण हो चुका है कि मूल तो छोडिये, ब्याज तक चुकाने के लिए और ऋण लिया जा रहा है. डॉलर १०० का होने जा रहा है, तब वो ऋण भी डॉलर में ही चुकाना पडेगा. देश दिवालिया होने की कगार पर हैं, जिसका असली रिजल्ट तो अभी सामने आना बाकी है. भ्रष्टाचार पहले से भी कई कई गुना बढ गया है.
पहले हम चीन से बराबरी करने लगे थे, अब उसके चौथाई भी नहीं रहे. क्या यही है अच्छे दिन?
और अभी तो बहुत ही ज्यादा अच्छे दिन आयेंगे, जब नये लोन द्वारा एनपीए से कंगाल हो चुके बैंक की डूबत सामने आयेगी. और यही आपकी अगली पीढी को भुगतना पडेगा.
इस बात को जितनी जल्दी समझ लेंगे, उतना ही बेहतर है…वरना……
कमल झँवर
साभार -फेसबुक

