आलमनगर के तीन प्रखंडों को बाढ़ प्रभावित घोषित करने का अल्टीमेटम नहीं तो चरण बद्ध तरीके से देंगे धरना : बिनोद आशीष बाढ़ की मार झेल रहे लोगों का सरकारी सूची से नाम गायब होना बेहद चिंताजनक है 27 अगस्त तक इसको गंभीरता से नहीं लेंगे तो तीनों प्रखंड मुख्यालयों में हजारों बाढ़ पीड़ितों के साथ दिया जाएगा धरना फोटो : विनोद आशीष जे टी न्यूज, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) रजनीकांत : बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता मे बिहार कैबिनेट नें बाढ़ पीड़ितों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दर्जा प्रदान किया गया l लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उनमे मधेपुरा जिला का नाम सूची में नहीं था l उक्त आशय की जानकारी वरिष्ठ पत्रकार सह समाजसेवी बिनोद आशीष ने दी l उन्होंने बताया कि ये राज्य सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है l साथ ही मधेपुरा को इस सूची से बाहर रखने का साफ मतलब है कि आलमनगर विधानसभा के 15 पंचायतों के लगभग 75 हजार परिवारों के साथ अन्याय हुआ है l बिनोद आशीष ने इसके लिए सीधे तौर पर 30 साल से पिछड़े और बाढ़ की यातना झेल रहे इस क्षेत्र के स्थानीय विधायक को पूर्ण रूप से जिम्मेवार बताया है l उन्होंने कहा की राज्य सरकार के इस निर्णय से यह जाहिर होता है कि सत्ता और मुख्यमंत्री के करीब रहने की बात करने वाले वरिष्ठ विधायक अप्रासंगिक और कमजोर हो चुके हैं l इतना ही नहीं आलमनगर विधानसभा के 75 हजार बाढ़ पीड़ित जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है l बिनोद आशीष ने स्थानीय विधायक को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर 7 दिन के अंदर उन्होंने राज्य सरकार से उदाकिशुनगंज अनुमंडल के तीनों प्रखंड चौसा, पुरैनी और आलमनगर को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र घोषित नहीं करवाया तो 28 अगस्त से तीनों प्रखंड मुख्यालय में हजारों बाढ़ पीड़ित भाईयों के साथ चरणबद्ध तरीके से विधायक के खिलाफ धरना और प्रदर्शन किया जायेगा l उन्होंने बताया की जिन 12 जिलों को बाढ़ ग्रस्त जिला घोषित किया गया है उनके साढ़े छह लाख परिवारों को 7 हजार रुपये सीधे पीड़ित परिवारों के खाते में देने का आदेश दिया गया है l उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे में 7 बार के विधायक कई बार के मंत्री, वर्तमान में विधानसभा के उपाध्यक्ष हमारे स्थानीय विधायक के नाकामी पर सवाल उठना लाजमी है l उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करते हुए सूची जारी की है. हैरानी की बात यह है कि मधेपुरा जिला को इस सूची से बाहर रखा गया है l इसका सीधा असर यहां के बाढ़ प्रभावित लोगों पर पड़ेगा l पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद आशीष ने इस मुद्दे पर सरकार के तरफ से नजरअंदाजी पर नाराज़गी जाहिर करते हुए स्थानीय विधायक को घेरते हुए उन्होंने कहा कि विधायक के छोटे प्रयास से पुरैनी, चौसा और आलमनगर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी सहायता राशि मिल सकती थी l क्योंकि मुख्यमंत्री ने जिस भी इलाके का हवाई दौरा किया है उन जिलों को लाभ मिला है।
बाढ़ की मार झेल रहे लोगों का सरकारी सूची से नाम गायब होना बेहद चिंताजनक है
आलमनगर के तीन प्रखंडों को बाढ़ प्रभावित घोषित करने का अल्टीमेटम /नहीं तो चरण बद्ध तरीके से देंगे धरना : बिनोद आशीष/ बाढ़ की मार झेल रहे लोगों का सरकारी सूची से नाम गायब होना बेहद चिंताजनक है
जे टी न्यूज, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) रजनीकांत :
बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता मे बिहार कैबिनेट नें बाढ़ पीड़ितों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दर्जा प्रदान किया गया l लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उनमे मधेपुरा जिला का नाम सूची में नहीं था l उक्त आशय की जानकारी
वरिष्ठ पत्रकार सह समाजसेवी बिनोद आशीष ने दी l उन्होंने
बताया कि ये राज्य सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है l साथ ही मधेपुरा को इस सूची से बाहर रखने का साफ मतलब है कि आलमनगर विधानसभा के 15 पंचायतों के लगभग 75 हजार परिवारों के साथ अन्याय हुआ है l बिनोद आशीष ने इसके लिए सीधे तौर पर 30 साल से पिछड़े और बाढ़ की यातना झेल रहे इस क्षेत्र के स्थानीय विधायक को पूर्ण रूप से जिम्मेवार बताया है l उन्होंने कहा की राज्य सरकार के इस निर्णय से यह जाहिर होता है कि सत्ता और मुख्यमंत्री के करीब रहने की बात करने वाले वरिष्ठ विधायक अप्रासंगिक और कमजोर हो चुके हैं l इतना ही नहीं आलमनगर विधानसभा के 75 हजार बाढ़ पीड़ित जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है l बिनोद आशीष ने स्थानीय विधायक को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर 7 दिन के अंदर उन्होंने राज्य सरकार से उदाकिशुनगंज अनुमंडल के तीनों प्रखंड चौसा, पुरैनी और आलमनगर को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र घोषित नहीं करवाया तो 28 अगस्त से तीनों प्रखंड मुख्यालय में हजारों बाढ़ पीड़ित भाईयों के साथ चरणबद्ध तरीके से विधायक के खिलाफ धरना और प्रदर्शन किया जायेगा l उन्होंने बताया की जिन 12 जिलों को बाढ़ ग्रस्त जिला घोषित किया गया है उनके साढ़े छह लाख परिवारों को 7 हजार रुपये सीधे पीड़ित परिवारों के खाते में देने का आदेश दिया गया है l उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे में 7 बार के विधायक कई बार के मंत्री, वर्तमान में विधानसभा के उपाध्यक्ष हमारे स्थानीय विधायक के नाकामी पर सवाल उठना लाजमी है l27 अगस्त तक इसको गंभीरता से नहीं लेंगे तो तीनों प्रखंड मुख्यालयों में हजारों बाढ़ पीड़ितों के साथ दिया जाएगा धरना
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करते हुए सूची जारी की है. हैरानी की बात यह है कि मधेपुरा जिला को इस सूची से बाहर रखा गया है l इसका सीधा असर यहां के बाढ़ प्रभावित लोगों पर पड़ेगा l पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद आशीष ने इस मुद्दे पर सरकार के तरफ से नजरअंदाजी पर नाराज़गी जाहिर करते हुए स्थानीय विधायक को घेरते हुए उन्होंने कहा कि विधायक के छोटे प्रयास से पुरैनी, चौसा और आलमनगर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी सहायता राशि मिल सकती थी l क्योंकि मुख्यमंत्री ने जिस भी इलाके का हवाई दौरा किया है उन जिलों को लाभ मिला है।
