सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा – तेजस्वी यादव

सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा – तेजस्वी यादव

जे टी न्यूज, पटना: जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग के जरिए होता है, तो सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा था?
19. एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ 7 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी बचे रसूखदार अधिकारियों और नेताओं को ‘‘क्लीन चिट’’ देने की जल्दबाजी नहीं है तो क्या है?
20. यह छक्। का संयोग कहिए या प्रयोग, सभी बड़े घोटालों में दबाव पड़ने पर अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी की दिखावटी गिरफ्तारी करनी-करानी है या उसे बलि का बकरा बनाना है तो वह दलित-पिछड़े और मुस्लिम समुदाय का ही अधिकारी क्यों होता है?
सृजन घोटाले में भी वही हुआ, प्रश्न पत्र घोटाले में भी वही हुआ, और अब इस रिशु श्री घोटाले में भी वही हुआ? तब भी अनुसूचित जाति वर्ग के सुधीर कुमार, संजीव हंस, योगेश सागर इत्यादि को ही अभियुक्त बनाकर जेल भेजा जाता है।
21 वर्षों की छक्। सरकार का भ्रष्टाचार के मामले में ैलेजमउंजपब थ्ंपसनतम व िळवअमतदंदबम का रिकॉर्ड स्थापित किया है। नीतीश कुमार जी इन सब भ्रष्टाचारियों के द्रोणाचार्य हैं। एक बात बता दूँ, बिहार के चंद अधिकारी विश्व के सबसे भ्रष्टतम अधिकारी हैं। एनडीए सरकार में नौकरशाही का इतना बोलबाला है कि जनप्रतिनिधियों की कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
क्या इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार बिना सत्ता में बैठे लोगों की सीधी या परोक्ष मदद के हो सकता है? अगर मुख्य साजिशकर्ता पर्दे के पीछे ही रहें और सिर्फ छोटे-मोटे लोग ही पकड़े जाएं, तो इस भ्रष्टाचार का असल किरदार कोई और ही है।


रिशु श्री तो छोटी सी झलकी है। अधिकारियों के बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों की कंपनियों और कंसल्टेंसी फर्म्स की जांच होनी चाहिए कि ये किस-किस माध्यम से किस-किस विभाग में घुसे हुए हैं और कैसे हर विभाग में प्लांटेड अधिकारियों से कैसे टेंडर मैनेज करते और करवाते हैं।
हम कहते थे नीतीश कुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उन्हें डिमेंशिया, अल्जाइमर संबंधित बीमारी है, अब सबके सामने है। हमने यह भी कहा था कि नीतीश कुमार का नाम लेकर बीजेपी अपना ब्ड बनाएगी और वह उन्होंने किया भी।
अभी बिहार भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ में है। ब्ड अपरिपक्व, अदूरदर्शी, नाकाबिल है। अधिकारी जानते हैं कि बड़बोले और बतोलेबाज ब्ड में कितनी गहराई है, कितनी समझ, विवेक और योग्यता है।
बताइए, ये ब्ड निवेश लाने की बजाय बिहार जैसे गरीब राज्य के पैसे से बने ढांचे को 1 रुपये में व्यापारियों को सौंप रहे हैं जो बिहारवासियों का दोहन करेंगे। रुपये में सैकड़ों एकड़ जमीन सौंप रहे हैं। ये अनूठा अंगूठा छाप ब्ड है जो सिर्फ दिल्ली के इशारे पर स्टाम्प लगाते हैं। ये ऐसे ब्ड हैं जो केवल भारी भरकम सुरक्षा और बड़ा आवास प्राप्त कर ही संतुष्ट हैं। दिल्ली वाले सारे अनैतिक और गलत काम कराएंगे और ये खुशी-खुशी करेंगे।
इस संवादाता सम्मेलन में प्रदेष अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चैधरी, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, पार्टी के प्रदेष मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, प्रदेष प्रधान महासचिव रणविजय साहू, वरिष्ठ नेता फैयाज आलम कमाल, प्रदेष प्रवक्ता अरूण कुमार यादव मौजूद थे।

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