अब रूपहले पर्दे पर जीवंत होगी ‘मैला आँचल’ के सर्जक फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की कहानी 

अब रूपहले पर्दे पर जीवंत होगी ‘मैला आँचल’ के सर्जक फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की कहानी


जे टी न्यूज़, अररिया : सीमांचल की माटी से निकले महान साहित्यकार, पद्मश्री सम्मानित कथाकार फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ का जीवन अब बड़े पर्दे पर साकार होने जा रहा है। हिंदी साहित्य को ‘मैला आँचल’ जैसी कालजयी कृति देने वाले रेणु के जीवन, संघर्ष, साहित्य और सामाजिक सरोकारों पर आधारित फिल्म निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस ऐतिहासिक पहल को सीमांचल की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सीमांचल की पहचान, संस्कृति और साहित्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि रेणु ने अपने साहित्य के माध्यम से जिस ग्रामीण भारत, लोकजीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता को शब्द दिए, वही अब सिनेमा के जरिए करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा।
सांसद ने बताया कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को प्रामाणिक स्वरूप देने के लिए मुंबई से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक फूल सिंह अपनी पूरी टीम के साथ सीमांचल पहुंचे हैं। टीम इन दिनों रेणु जी के जीवन से जुड़े स्थलों, उनके पैतृक गांव, साहित्य की पृष्ठभूमि, लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज, बोली-बानी और सामाजिक परिवेश का गहन अध्ययन कर रही है, ताकि फिल्म में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का वास्तविक एवं प्रभावशाली चित्रण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ केवल एक लेखक नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन के सबसे सशक्त दस्तावेजकार थे। उनकी रचनाओं ने गांव, किसान, लोकसंस्कृति, सामाजिक विषमताओं और मानवीय रिश्तों को जिस संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया, वह विश्व साहित्य में भी विशिष्ट स्थान रखता है। ऐसे महान साहित्यकार के जीवन पर बनने वाली फिल्म नई पीढ़ी को उनकी विचारधारा, संघर्ष और साहित्यिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी।
सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने विश्वास जताया कि इस फिल्म के माध्यम से अररिया, फारबिसगंज, औराही हिंगना सहित पूरे सीमांचल की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिलेगी। इससे क्षेत्र के लोक कलाकारों, साहित्यकारों और स्थानीय प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर प्राप्त होगा।
उन्होंने क्षेत्र के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक अभियान में सक्रिय सहयोग दें और अपने सुझाव साझा करें, ताकि फिल्म तथ्यपरक, प्रामाणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध बन सके।

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सांसद ने मुंबई से आए निर्माता-निर्देशक फूल सिंह एवं उनकी पूरी टीम का सीमांचल की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए रेणु जी के व्यक्तित्व, साहित्य और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज सिद्ध होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रयास सीमांचल की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
प्रेस वार्ता के अंत में सांसद ने मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज और संस्कृति के बीच मजबूत सेतु का कार्य करती है। उन्होंने सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया इस ऐतिहासिक पहल को जन-जन तक पहुंचाकर रेणु जी की साहित्यिक विरासत को और अधिक व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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