तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव को उदघाटन

तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव को उदघाटन

जे टी न्यूज, मधुबनी
लदनिया: प्रखंड के पिपराही में आदर्श महिला मंडल लड़ुगामा के द्वारा आयोजित तथा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा प्रायोजित कल्चर फंक्शन एंड प्रोडक्शन ग्रांट स्कीम के तहत तीन दिवसीय मिथिला लोक उत्सव को उदघाटन करते हुए डॉ भारती मेहता बिहार विधान परिषद के सदस्य ने कहा कि आज भारत नेपाल सीमा पर स्थित इस मिथिला के पावन धरती पर मिथिला लोक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है. जो कला एवं संस्कृति को जीवंत करने का काम करेगी, साथ ही इस उत्सव में लोककला, लोकगीत, लोकनृत्य एवं पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर इसका प्रचार प्रसार करने का काम करेगी. इसे पहले स्वागत संबोधन समाजसेवी राम कुमार राय ने किया था. इसके अतिरिक्त सांसद प्रतिनिधि शिव कुमार, प्रखंड प्रमुख सत्य नारायण सफी, राजेश तथा गंगाधर यादव भी उपस्थित थे.
कार्यक्रम का शुभारंभ में पहले दिन गीत संगीत के कार्यक्रम में रूपांजलि कुमारी और निर्मला कुमारी के द्वारा संयुक्त रूप से मैथिली गीत अतिथिगण नमन करू स्वीकार के साथ शुरू किया गया. शिवम मिश्रा के द्वारा विद्यापति के गीत जै जै भैरवी असुर भयावनी, पशुपति भाव नी माया तथा सूफी में सामा चकेवा डोमकछ झिझिया की प्रस्तुति की। रजनी झा के द्वारा हमरो अंगनवा मैया एक बेर अव्यक हे दुर्गा महारानी के अतिरिक्त भाषा मधुर जकर उ मधुरभाषी छियो, हम मिथिला वासी छियो की प्रस्तुति दी गई. विवेक वैरागी के द्वारा न नचारी जगत विदित वैद्यनाथ सकल गुण सकल आगर हे के अतिरिक्त सूफी में नैनों ने थारी , कैसा जादू किया रे थारे बिना लागे नहीं , म्हारा जिया रे के अतिरिक्त ये ज़मीं जब न थी, ये जहाँ जब न था, चाँद सूरज न थे, आसमाँ जब न था” कि प्रस्तुति दी। निर्मल कुमारी के द्वारा फूलों में सज रहे है, वृन्दावन बिहारी तथा छाप तिलक सब छिनी रे मोसे नैना मिलायी के की प्रस्तुति दी गई। रूपांजलि कुमारी के द्वारा लोकगीत बाबा दिहले टिकवा से हो रहे हम तेजब बलमुआ कैसे तेजब रे छोटी ना नदी‌ के अलावे बड़ा निक लागे पिया नाक के नथुनिया की प्रस्तुति दी गई। आनंद कुमार ठाकुर के द्वारा गजल बाँही में रहु न रहु आँखी में रहु, दुनिया में चार दिन जे रही सामने रहु के अलावे हिंदी गजल मैं तो हवा हूं किस तरह पहरे लगाओगे, महसूस करोगे मुझे छूने ना पाओगे कि प्रस्तुति दी गई। इसके अतिरिक्त शिवम मिश्रा तथा विवेक वैरागी के द्वारा संयुक्त रूप से हे गौरा तोहरो सजनमा ना,तोहरो सजनवा किछुवो ना बुझौ से,ऑर्डर धरनवा ना की प्रस्तुति दी गई.


वाद्य यंत्र पर राहुल मनीष के द्वारा पैड पर, धीरज मिश्रा के द्वारा तबला पर, शिवम ठाकुर के द्वारा ढोलक पर, परमेश्वर ठाकुर के द्वारा कीबोर्ड पर तथा नवीन कुमार के द्वारा गिटार बजाया गया। मंच का संचालन मिथिलेश कुमार तथा उपेंद्र पासवान के द्वारा किया गई. कैमरा पर देवेंद्र कुमार तथा रामपूजन थे.

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