वंदे मातरम बना सियासत का अखाड़ा सीपीआई एम का भाजपा पर तीखा हमला वंदे मातरम को लेकर गरमाई सियासत

वंदे मातरम बना सियासत का अखाड़ा सीपीआई एम का भाजपा पर तीखा हमला
वंदे मातरम को लेकर गरमाई सियासत

जे टी न्यूज़, पटना : (बिहार)भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)के पोलित ब्यूरो ने ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पदों को लेकर संसद में हुई चर्चा और उसके बाद इसके कथित राजनीतिक दुरुपयोग पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा और हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक शक्तियां इस मुद्दे को देशभक्ति के एकमात्र पैमाने के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं,जो देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है।
सीपीआई(एम) ने अपने बयान में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पदों को लेकर स्वतंत्रता संग्राम और संविधान सभा के दौरान कोई आपत्ति नहीं रही है। पार्टी के अनुसार, गीत के शेष पदों को लेकर उसके ऐतिहासिक संदर्भ और ‘आनंदमठ’ उपन्यास से जुड़े प्रसंगों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पोलित ब्यूरो ने कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीतिक या सांप्रदायिक प्रतिस्पर्धा देशहित में नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सभी छह पदों के गायन को देशभक्ति का अनिवार्य प्रमाण बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। बयान में यह भी कहा गया कि देशभक्ति का दावा करने वालों की कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। सीपीआई(एम) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रगान के दौरान बीच में चले जाने की घटना का उल्लेख करते हुए भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
पोलित ब्यूरो ने जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान में स्वीकार की गई सभी अवधारणाओं और मूल्यों का सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि भारत की ताकत उसकी बहुलता,विविधता,लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशिता में है। सीपीआई(एम) ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति के सवाल को राजनीतिक विवाद का माध्यम बनाने के बजाय संविधान की भावना और देश की एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Related Articles

Back to top button