जगदीश मित्तल (परमार्थी) “बाबूजी” के आत्मशांति हेतु श्रद्धांजलि सभा आयोजित

जगदीश मित्तल (परमार्थी) “बाबूजी” के आत्मशांति हेतु श्रद्धांजलि सभा आयोजित

 

जे टी न्यूज, सुपौल: राष्ट्रीय कवि के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल (परमार्थी) “बाबूजी” के आत्मशांति हेतु को राष्ट्रीय कवि संगम सुपौल जिला इकाई द्वारा सुपौल जिला स्थित प्रांतीय संगठन मंत्री श्री रविभूषण के कोचिंग संस्थान माहेश्वरी विद्यासेतु में श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय बाबूजी का निधन दिनांक 03.09.2026 को बालाजी कैंसर हॉस्पिटल, पश्चिम विहार दिल्ली में हो गया था, जहां से उनके पार्थिव शरीर को गृह क्षेत्र जगाधरी, हरियाणा में अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से साहित्य जगत को जो क्षति हुई है वो अपूरणीय है। उनके स्मृति में देशभर में श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से ईश्वर से उनके आत्मशांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
आज सुपौल जिला इकाई द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें जिलेभर के गणमान्य व्यक्ति तथा काव्य जगत से जुड़े लोगों ने भाग लेकर बाबूजी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ भजन कीर्तन चलता रहा। कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति से संगीतमय माहौल बना रहा। इसके साथ ही जिला इकाई के सामूहिक प्रयास से भंडारा का आयोजन किया गया तथा प्रसाद स्वरूप प्रत्येक आने जाने वाले व्यक्तियों के बीच दिनभर खीर का वितरण चलता रहा।
इस बीच आदरणीय बाबूजी, राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक, भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के पूर्व संगठन मंत्री सहित अनेकों पद को शोभायमान करने वाले जगदीश मित्तल के व्यक्तित्व, साहित्य एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया।
आदरणीय बाबूजी व्यक्ति नहीं बल्कि व्यक्तित थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारतवर्ष और साहित्य को समर्पित कर दिया। भले ही वे कवि नहीं थे लेकिन वो कड़ी थे जिन्होंने हजारों नवोदित कवियों को मंच दिया, जो आज देश विशेष में अपनी कलम को आवाज दे रहे हैं। बाबूजी का जीवन हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है। जहां हमारे समाज में विवाह को एक सामाजिक संस्था माना जाता है, वही बाबूजी ने इस संस्था को छोड़ राष्ट्रीय कवि संगम परिवार के रूप में एक ऐसे संस्था की स्थापना की जहां का हर सदस्य उनका परिवार था। “वो कहते थे कि विवाह कर लेता दो-चार बच्चे होते, इतना बड़ा मेरा परिवार नहीं होता। मैं गर्व से कहता हूं कि मेरे से बड़ा परिवार पूरे भारतवर्ष में किसी का नहीं है।” महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज के महासचिव रहते हुए उन्होंने शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंग दान कर दिये थे और उन्होंने अपना शरीर तक मेडिकल कॉलेज को दान कर दिये थे लेकिन संक्रमण के वजह से उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई। ऐसे महान व्यक्तित्व का इस संसार से विदा लेना साहित्य जगत के एक युग का अंत हो जाने जैसा प्रतीत हो रहा है। राष्ट्रीय कवि संगम के अविभावक हमारे बाबूजी हमेशा कहते थे कि “चलने का इतना आदी हो गया हूँ कि रुकता हूं तो थक जाता हूं “। इसलिए राष्ट्रीय कवि संगम रूपी यह वटवृक्ष सदैव आगे बढ़ता रहे यही सामूहिक प्रयास रहेगा


आज उनके निधन पर सुपौल जिला इकाई द्वारा अपने अविभावक को अंतिम प्रणाम के साथ पुष्प अर्पित कर नम आंखों से विदाई दिया गया। सुपौल नगर परिषद के चेयरमैन श्री राघवेंद्र झा “राघव” भी उपस्थित होकर जगदीश मित्तल “बाबूजी” को श्रद्धांजलि अर्पित किए। जिलेभर से आए कवि-कवित्रियों ने संगीत तथा अपनी रचना के माध्यम से बाबूजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके व्यक्तित्व का उल्लेख किया। साथ ही इस श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय कवि संगम सुपौल जिला इकाई के जिलाध्यक्ष नलिन जायसवाल, प्रांतीय संगठन मंत्री श्री रविभूषण, बिंदु श्रीवास्तव, अभिलाषा मिश्रा, कल्याणी स्वरूपा, आनंद भारती, संगीता कुमारी, जया, मुस्कान, कुमार संभव,गौरव जी,अमित तिवारी,नगर कार्यवाह,केशव राज,राजधर यादव,राजेश मल्लिक,वार्ड पार्षद बबलू कामत सहित भजन मंडली के सभी कलाकार तथा अनेकों काव्य प्रेमी उपस्थित रहें।

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