खुद_को_लिखते_रहो
खुद_को_लिखते_रहो

जे टी न्यूज
खुद को लिखते रहो,
जिन्दगी के बेहिसाब दर्द को,
शब्दों में पिरोते रहो।
बेखबर है जमाना,
तुम्हारे एहसास और ज़ज्बात से,
तुम किसी और के लिए मत रोते रहो,
खुद ही अपने गमों को सिलते रहो।
खुद को तुम लिखते रहो।
मीठा बोलो कड़वी घूँट पीते रहो।
खुद में तुम मूल्यवान हो,
स्वयं की कीमत बढ़ाते रहो ,
जिन्दगी को कर्मरूपी रंगों में डुबोते रहो,
खुद को तुम लिखते रहो।
जीवनरूपी किताबों के सतरंगी पन्ने पलटते रहो।
अपनी ख़ामोशियों को खुद सुनते रहो,
खुद को तुम लिखते रहो।
अनुपमा सिंह सोनी

