भ्रष्टाचार शैक्षिक संस्थानों का सामान्य आचार बन चुका संस्थान प्रमुख का एक ही गुण है —भ्रष्टाचार प्रबंधन
मीडिया मैंनेजमेंट, मिनिस्टर मैंनेजमेंट, कोर्ट मैंनेजमेंट और ब्यूरोक्रेसी मैंनेजमेंट
भ्रष्टाचार शैक्षिक संस्थानों का सामान्य आचार बन चुका संस्थान प्रमुख का एक ही गुण है —भ्रष्टाचार प्रबंधन
मीडिया मैंनेजमेंट, मिनिस्टर मैंनेजमेंट, कोर्ट मैंनेजमेंट और ब्यूरोक्रेसी मैंनेजमेंट
जे टी न्यूज, पूसा/दिल्ली: इन्हीं का सम्मिलित नाम है -भ्रष्टाचार प्रबंधन। कुशल भ्रष्टाचार प्रबंधन ही आज की एकेडमिक लीडरशिप है। CAG,विजिलेंस आदि की रिपोर्ट पर कार्रवाई किसी गुजरे जमाने की बात हो गयी है। कई कुलपति CAG की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार में लिप्त पाये गये हैं। वित्तीय अनियमितता के मामले का खुलासा स्वयं CAG द्वारा किया गया है। GFR के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गयी हैं। सैम्पल ऑडिट जो लगभग 10% का होता है उसमें लाखों रुपये की अनियमितता का मतलब है करोड़ों की अनियमितता। काम से दस गुने से भी अधिक पेमेंट के मामले सामने आ रहे हैं। अवैध टेंडर, गैर पंजीकृत कम्पनियों को भुगतान आदि के मामले की रिपोर्ट CAG द्वारा दर्ज है। दीक्षांत और दीक्षारम्भ का तो खेल ही निराला है। केवल फूल-पत्ती और बैनर पर एक दिन के कार्यक्रम में उतने व्यय किये जा रहे हैं जितने में 16 गरीबों का इंदिरा आवास योजना में घर बन जाता है। जितने घोटाले में लालू यादव की सरकार चली गयी थी उससे अधिक का घोटाला तो बिहार के शैक्षिक संस्थानों में प्रति वर्ष होता है। अजीब बात यह है कि सरकार अपनी संवैधानिक संस्था CAG की रिपोर्ट पर भी अब कार्रवाई करने से बच रही है। जिन्हें तिहाड़ में होना चाहिए वे डाली लेकर दिल्ली घूम रहे हैं। कुछ कुलपति सरकार के लिए घातक हो गये हैं। ये अपने भ्रष्ट आचरण से सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। इन पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

