सैनिक की पत्नी का जीवन..
सैनिक की पत्नी का जीवन..
जे टी न्यूज़
यहाँ मरण का सोच निमित बलिदानों का भी ज्ञान नहीं,
सैनिक की पत्नी का जीवन इतना भी आसान नहीं।
पत्थर भी पिघला करते हैं
देख के करुण कहानी को,
कण्ठ सूख जाता पीकर
आंखों के खारे पानी को।
दिल के टुकड़े हो जाते हैं
बिरथा देख जवानी को।
मधुमास बताया करते हैं
यौवन की रोज कहानी को
ये चूड़ी बिछुआ कहते हैं
इतनी सी उमर लिखी मेरी,
मंगलसूत्र के हर मनका में
सारी याद छुपीं तेरी,
कितनी कसक उठीं हैं उर में उसको ये भी भान नहीं,
सैनिक की पत्नी का जीवन इतना भी आसान नहीं।
खड़ी हुई दरवाजे पर वो
राह निहारा करती है,
अपने अंदर की स्त्री को
पल- पल मारा करती है।
बनकर एक दिव्य ज्योति
आंगन में जलती रहती है।
नई भोर की नई किरण संघ,
आशा पलती रहती है।
सारे नाते – रिश्तो को
रखती है पिरोकर माला में,
घर उपवन सा महक रहा
खुद जली विरह की ज्वाला में।
कितने खार बिछे हैं पथ में इससे भी अजांन नहीं,
सैनिक की पत्नी का जीवन इतना भी आसान नहीं।।
ओज कवयित्री – अंशु छौंकर ‘अवनी’


