कविता और भाषण के माध्यम से छात्रों ने उठाई ‘नदी बचाओ’ की आवाज़ नदियाँ हमारी जीवनरेखा, इसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी : डीपीओ आनंद अंकित
कविता और भाषण के माध्यम से छात्रों ने उठाई ‘नदी बचाओ’ की आवाज़
नदियाँ हमारी जीवनरेखा, इसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी : डीपीओ आनंद अंकित
नदी एवं अन्य जलस्रोतों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी
जे टी न्यूज,मधुबनी

जिला गंगा समिति, नमामि गंगे, मधुबनी के तत्वावधान में आज वॉटसन स्कूल सभागार में स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच “नदी एवं अन्य जलस्रोतों के संरक्षण” विषय पर भाषण प्रतियोगिता एवं कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने अपने विचार एवं रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर नमामि गंगे के डीपीओ आनंद अंकित ने अपने संबोधन में कहा कि नदियाँ हमारी संस्कृति और जीवन का आधार हैं। यदि हम आज जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट उत्पन्न हो सकता है। इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जिला समन्वयक, आईसीडीएस, स्मित प्रतीक ने कहा कि “बच्चों के बीच इस तरह की प्रतियोगिताएं न केवल उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करती हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील भी बनाती हैं।” उन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

वहीं, सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित नगर निगम, मधुबनी के स्वच्छता पदाधिकारी अमिताभ गुंजन ने कहा कि “नदियों की स्वच्छता बनाए रखना केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी का दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर स्वच्छता को अपनाए, तो नदियों की निर्मलता एवं पवित्रता को कायम रखा जा सकता है।” उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन विद्यालय के नवाचारी वरीय विज्ञान शिक्षक पवन कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वच्छता साथी अविनाश कुमार सहित शिक्षक सुधांशु शेखर, ओमप्रकाश, मनोज कुमार, वरुण कुमार चौधरी, संजीव कुमार, हेमंत झा, ओजैर अहमद, मुकेश गिरी, नेहा कुमारी, प्रीति चौधरी, प्रभा कुमारी, नेमत अली एवं केशवनाथ झा का सराहनीय योगदान रहा।



