अपनों से क्यों रूठ जाते हैं लोग
अपनों से क्यों रूठ जाते हैं लोग

जे टी न्यूज
अपनों से क्यों रूठ जाते हैं लोग,
बात-बात पर टूट जाते हैं लोग।
जो कभी धड़कन में बसते थे,
वही दिल से छूट जाते हैं लोग।
थोड़ी सी गलतफहमी क्या हुई,
रिश्तों से ही मुँह मोड़ जाते हैं लोग।
अहम की ऊँची दीवार बनाकर,
प्यार के रास्ते छोड़ जाते हैं लोग।
रिश्ते तो अनमोल खज़ाना हैं,
फिर क्यों इन्हें तोड़ जाते हैं लोग।
दो मीठे शब्दों से जो सँवर जाएँ,
उन्हें आँसुओं में डुबो जाते हैं लोग।
माना हर इंसान से भूल होती है,
पर माफ़ी से रिश्ते जुड़ जाते हैं।
जो अपनों को अपना समझते हैं,
वो कभी न रूठकर दूर जाते हैं।
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है,
इसे प्रेम और विश्वास से निभाइए।
अपने अगर रूठ जाएँ कभी,
तो पहले बढ़कर उन्हें मनाइए।
शांति देवी चौहान
देशनोक बीकानेर राजस्थान

