महिला आरक्षण पर भाजपा के भ्रामक प्रचार के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन, आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग

महिला आरक्षण पर भाजपा के भ्रामक प्रचार के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन, आरक्षण तत्काल लागू करने क  .

टी न्यूज, पटना:

 

भाकपा–माले और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (AIPWA) के आह्वान पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार के खिलाफ आज पटना सहित पूरे बिहार में प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए. पटना में जीपीओ गोलंबर से बुद्ध स्मृति पार्क तक एक मार्च निकाला गया, जो सभा में तब्दील हुआ.

 

इस कार्यक्रम का नेतृत्व AIPWA की महासचिव मीना तिवारी, एमएलसी शशि यादव, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, के.डी. यादव, अनीता सिन्हा, शत्रुघ्न सहनी, रीना प्रसाद, अनुराधा सिंह, शहजादे आलम, रामबली प्रसाद, जितेंद्र कुमार, मुर्तजा अली, विभा गुप्ता, राजेंद्र पटेल, पुनीत पाठक, कुमार दिव्यम, संजय यादव तथा AISA की सबा आफरीन, आशीष, मनीषा यादव, प्रिया गुप्ता, नीतू कुमारी सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किया. पटना के अलावा आरा, अरवल, दरभंगा, सिवान, गया, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, बिहारशरीफ और गोपालगंज समेत विभिन्न जिलों में भी प्रदर्शन हुए.

 

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षण तत्काल लागू करो, दलित–पिछड़ी महिलाओं को समुचित हिस्सेदारी दो और जातीय जनगणना शीघ्र पूरी कर लागू करो जैसे नारे लगाए.

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भाजपा यह झूठा प्रचार कर रही है कि विपक्ष महिला आरक्षण लागू नहीं होने दे रहा है, जबकि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक सितंबर 2023 में ही संसद द्वारा पारित किया जा चुका है. हाल में जो विधेयक गिरा, वह परिसीमन (डिलिमिटेशन) से संबंधित था, न कि महिला आरक्षण से.

 

वक्ताओं ने आज बिहार विधानसभा में विपक्ष के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव की भी कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास है. जनता के वास्तविक मुद्दों—महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय, बेरोजगारी और महंगाई—से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं.

वक्ताओं ने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन और नई जनगणना को अनिवार्य शर्त क्यों बनाया जा रहा है? उनका आरोप था कि भाजपा महिला आरक्षण लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है और इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है.

 

उन्होंने कहा कि परिसीमन एक गंभीर और व्यापक विषय है, जिस पर राष्ट्रीय स्तर पर सहमति बननी चाहिए. भाजपा की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वह चुनावी लाभ के लिए सीटों के पुनर्गठन की दिशा में काम कर रही है. इतिहास में कभी भी आरक्षण लागू करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी शर्त नहीं रही है.

 

वक्ताओं ने महिला आरक्षण के भीतर ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग को भी न्यायोचित बताते हुए कहा कि दलित और पिछड़ी महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है.

 

अंत में, वक्ताओं ने आह्वान किया कि भाजपा के भ्रामक प्रचार का व्यापक स्तर पर पर्दाफाश करने और महिला आरक्षण को दलित–पिछड़ी महिलाओं के कोटे के साथ तत्काल लागू कराने के लिए राज्यभर में सघन अभियान चलाया जाएगा. प्रखंड मुख्यालयों से लेकर गांवों और चौक-चौराहों तक नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाई जाएगी.

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