परिस्थितिओं के मुख्यमंत्री दूसरे संभ्रांत वर्चस्वादी ताकतों को चुनौती देने वाले मुख्यमंत्री – प्रियंका
Pm परिस्थितिओं के मुख्यमंत्री दूसरे संभ्रांत वर्चस्वादी ताकतों को चुनौती देने वाले मुख्यमंत्री – प्रियंका

जे टी न्यूज, दिल्ली: मेरा जन्म 1997 में हुआ, उसी साल जिस साल 5 जुलाई को राजद की स्थापना हुई।
छोटी थी, जब कभी-कभी पापा घर के आए मेहमानों के सामने अक्सर दो ही चीज़ें पूछा करते थे~“बेटा, अंग्रेज़ी में कुछ बोलकर दिखाओ” और दूसरा, “बिहार की मुख्यमंत्री कौन हैं?” मैं हमेशा गर्व से कहती, “Rabri Devi is the CM of Bihar.” गर्व का भाव इसलिए क्योंकि एक महिला मुख्यमंत्री थीं और गर्व इसलिए भी क्योंकि अपने आस-पास ही देखती थी कि छोटी उम्र में बच्चियों की शादी कर दी जा रही है, पढ़ाने-लिखाने में पूंजी सिर्फ़ बेटों पर खर्च की जा रही है उस वक़्त एक महिला को CM देखना एक बच्ची के कोमल मन को शीतलता देता था।
जब JNU पहुँची, तो धीरे-धीरे राजनीति और विचारधाराओं को समझने की शुरुआत हुई। जब बटलर, सिमोन द बुवार, रोज़ा पर्क्स, रोज़ा लक्ज़मबर्ग, हन्ना अरेंड्ट, सावित्री बाई, माया एंजेलू इत्यादि को पढ़ रही थी, तब पता चला कि बिहार में लालू जी ही वे नेता हुए जिन्होंने महिलाओं को महावारी के दौरान दो दिन का अवकाश दिया, जो दुनिया में बहुत कम देशों में है। Mic जिस जातिगत सच्चाई और आर्थिक बेबसी से निकली थी, ख़ुद को राजद से जोड़ पाई और छात्र राजद से जुड़ी और राष्ट्रीय प्रवक्ता का सफ़र तय किया, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका मेरे नेता तेजस्वी जी की रही।

हमेशा इस बात पर गर्व महसूस करती हूँ कि स्थापना दिवस से ही पार्टी ने महिला CM दिए। राबड़ी जी को जब मौक़ा मिला, पहली बार बिहार का बजट सरप्लस हुआ। जब से पार्टी की स्थापना हुई, तब-तब जब-जब हमारी सरकार रही, चाहे मंत्रिमंडल हो, विधायक हों, संसद हो या राज्यसभा, हर जगह सामाजिक और आर्थिक, दोनों स्तर पर विविधता देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना के बाद इसके पहले 3 प्रदेश अध्यक्ष कमल पासवान जी, उदय नारायण चौधरी जी और पीताम्बर पासवान जी दलित वर्ग से रहे। अल्पसंख्यक समुदाय से अब्दुल बारी सिद्दीक़ी जी रहे। पिछड़े वर्ग से रामचन्द्र पूर्वे जी रहे, जगदानंद सिंह जी रहे और अभी अतिपिछड़े वर्ग से मंगनीलाल मंडल जी हैं। राष्ट्रीय जनता दल इस देश का पहला दल है जिसने 2019 में अपने सांगठनिक चुनावों में कुल 45% आरक्षण लागू किया, 28% पिछड़ों-अतिपिछड़ों के लिए और 17% दलितों-आदिवासियों के लिए।
राजद ने शोषितों की सोई हुई चेतना को झकझोरने का काम किया, वही काम जो कर्पूरी ठाकुर जी ने, जगदेव प्रसाद जी ने, कांशीराम जी ने किया। वही, जिसे लालू जी ने मज़बूती से धरातल पर उतारा। राष्ट्रीय जनता दल ने विचारों से लैस कर वंचितों को सशक्त किया। अन्याय का प्रतिकार करना सिखाया और हक़ व आत्मसम्मान के लिए लड़ना सिखाया। राजद करोड़ों लाचार, वंचित, उपेक्षित, बेबस लोगों की पार्टी है, जो उनकी आकांक्षाओं के लिए काम करती है।
जिस बिहार में मेरा जन्म हुआ, वहीं दो तरह के CM देखे- एक घुटना टेक मुख्यमंत्री और दूसरे सीना तान मुख्यमंत्री। एक परिस्थितिओं के मुख्यमंत्री दूसरे संभ्रांत वर्चस्वादी ताकतों को चुनौती देने वाले मुख्यमंत्री।
नीतीश जी हमेशा वर्चस्वशाली शक्तियों के आगे घुटने टेकते रहे, वहीं लालू जी उस संघर्ष के प्रतीक हैं, जिसमें लड़ाई आर-पार की रही और विचारों से कोई समझौता नहीं हुआ, और उस धारा को तेजस्वी जी आगे बढ़ा रहे हैं। ये कारवाँ निरंतर बढ़ता रहे।

