सेटेलाइट टाउनशिप के खिलाफ किसानों का महा हुंकार।

22 जुलाई को किसानों विरोधी मोदी और सम्राट का पुतला दहन

सेटेलाइट टाउनशिप के खिलाफ किसानों का महा हुंकार।
22 जुलाई को किसानों विरोधी मोदी और सम्राट का पुतला दहन


जे टी न्यूज़, पटना : 23,24 एवं 25 जुलाई को प्रतारित किसानों का विशाल जत्था बांकीपुर विधानसभा में घर-घर जाकर एन डी ए उम्मीदवार को हराने के लिए जन सम्पर्क अभियान चलाएंगे। एस के एम ने बाँकीपुर उप चुनाव में एनडीए को हराने का लिया सर्वसम्मत फैसला।
अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ 22 जुलाई को देशव्यापी मोदी का पुतला दहन,बिहार में मोदी और सम्राट दोनों का होगा पुतला दहन।
सेटेलाइट टाउनशिप के बदले प्रवासी बिहारियों को वापस लाने के लिए बिहार में कृषि एवं कृषि आधारित उद्योग का विकास एवं विस्तार हो। यदि सरकार की नियत बिहार का विकास होता तो बाढ-सुखाड़ का स्थाई निदान,गाँव-गाँव में शिक्षा,स्वास्थ्य और परिवहन की बेहतर सुविधा एवं रोजगार की गारंटी होता।बिहार को सेटेलाइट टाउनशिप नही,स्मार्ट गाँव चाहिए।दुर्भाग्य से विकास का शब्दजाल में बिहारियों को फंसाकर हमारे पुरखों की वपौती खेत को हमसे छीन कर सरकार अपने कॉर्पोरेट्स मित्रों को सौपना चाहती है।
विश्व के मशहूर क्रांतिकारी किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक पटना में संयुक्त किसान मोर्चा,बिहार के चिंतन शिविर में सैकड़ों किसान नेताओं ने आज संकल्प लिया है कि बांकीपुर चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को भारी मतो से पराजित कर किसान अपने गुस्से का इजहार करेंगे।
बिहार में सेटलाइट टाउनशिप,भारतमाला सड़क परियोजना,चौसा थर्मल पावर,रेलवे विस्तारीकरण, पिपराकोठी में वाटर पार्क और प्रस्तावित परमाणु बिजली घर बांका के नाम पर लगभग 5 लाख एकड़ हमारी उपजाऊ भूमि से किसानों को जबरन बेदखल करने के खिलाफ उठे विवाद एक समान संदेश देते हैं कि विकास और लोकतंत्र के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जनविश्वास है। सरकार कहती है कि शहरी विकास समय की मांग है।मगर किसानों के लिए खेत केवल आर्थिक संपत्ति नहीं बल्कि जीवन की पहचान और भविष्य की सुरक्षा का आधार है।खेती सिर्फ हमारी जीविका ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति,हमारी तहजीब,हमारी जीवन शैली,रस्मो-रिवाज,रहन-सहन,पूजा-पाठ और पर्व-त्यौहार सब कुछ कृषि आधारित हैं।भयानक कोरोना काल में मुंबई और बेंगलुरु से लाखों-लाख बिहारी पैदल इसलिए अपने गाँव की ओर निकल पड़े, बेटी बाप को साईकिल पर बिठाकर दिल्ली से दरभंगा इसलिए लाई कि गांव में उसके पास 7 कठ्ठा, 9 कठ्ठा या 13 कठ्ठा खेत था। हमारे पुरखों ने पेट काट कर खेत को सम्हाल कर रखा,वे अपने खेत को अपने बेटा से भी ज्यादा महत्व देते थे।उन्होंने जिस जमीन को स्वयं भूखा रहकर बचाया और वसियत के तौरपर हमे सौपा है।आज उस बहुमूल्य उपहार को उनकी अमानत को जबरन हमसे छीनने के लिए सरकार उतावली है। किसान विरोधी कानून बनाकर सत्ता की मदहोश ताकत के बल पर तानाशाही सरकार ने किसानों को अपनी माँ जैसी जमीन से बेदखल करने की जो मंसूबा बांधा है। तानाशाही मोदी- सम्राट की सरकार के मंसूबो को किसान अपनी चट्टानी एकता के बल पर चकनाचूर करेंगे। जब संसद में 302 सांसद मोदी जी को था, तब किसानों ने अपनी एकजूटता के बल पर उन्हें थूक चटाया था।आज तो संसद में उनकी बहुमत भी नहीं है।इसलिए लड़खड़ाते मोदी एवं सम्राट को एक धक्का और दो के नारे के साथ गांव-गांव में एक अभियान चलाएंगे। किसानों,बटाईदारों,खेतिहर मजदूरों एवं कृषि पर निर्भर हर समूहों को संगठित कर दिल्ली किसान आंदोलन की तर्ज पर ऐतिहासिक जुझारू एवं शांतिपूर्ण आंदोलन बिहार में चलाएंगे। अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा संपूर्ण भारत में मोदी का पुतला जलाने के आह्वान पर संयुक्त किसान मोर्चा बिहार में 22 जुलाई को हम मोदी एवं सम्राट चौधरी दोनों का पुतला दहन करेंगे एवं बांकीपुर चुनाव से सम्राट चौधरी के उम्मीदवार का जमानत जप्त करा कर किसान अपना आक्रोश व्यक्त करेंगे।


किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह, दिनेश कुमार,
अमेरिका महतो,जनक देव सिंह,बैजनाथ सिंह, पशुपतिनाथ सिंह,मो शाहीद कमाल,ई.अनिल कुमार, अशोक कुमार सिंह,धर्मेंद्र सिंह चौहान,राजेश सिंह,सोमनाथ कुमार,मनीष कुमार,विनोद कुमार सिंह,ओम प्रकाश सिंह,अंजनी कुमार,बृजेश राय,अश्वनी चौबे,मुन्ना तिवारी,सुरेश मिश्रा, शिव शंकर सिंह,जितेन्द्र प्रसाद आर्य,डाॅ विनय सिंह, गोपाल शर्मा, मोहन मुरारी,दीपक कुमार,ओम प्रकाश सिंह,रमेश कुमार,
संजय कुमार सिंहा,सिद्धनाथ सिंह एवं प्रमोद कुमार
आदि ने चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए अपना विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए किसान नेता देव कुमार जी ने किसानों एवं खेतिहरों को ललकारते हुए संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया

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