दुनियाँ की नजरों में नहीं, अपने अंतर्मन की नजरों में बड़ा बनें ” बिमल सर्राफ

दुनियाँ की नजरों में नहीं, अपने अंतर्मन की नजरों में बड़ा बनें ” बिमल सर्राफ


जे टी न्यूज, रक्सौल, पूर्वी चंपारण : सुख और दुःख जीवन के दो ऐसे पहलू हैं, जो एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। जीवन हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार नहीं चलता। कभी सफलता मिलती है तो कभी असफलता, कभी खुशी आती है तो कभी कठिन परिस्थितियाँ सामने खड़ी हो जाती हैं। यही उतार-चढ़ाव जीवन को वास्तविक अर्थ देते हैं।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद्, रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, सफलता और सम्मान चाहता है। लेकिन केवल अच्छी परिस्थितियों की इच्छा करना पर्याप्त नहीं है। जीवन में कठिन समय भी आएगा और कई बार हमारी मेहनत के बावजूद परिणाम हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं होंगे। फिर भी प्रयास करते रहना ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।

कोशिश करने से हर परिस्थिति हमेशा हमारे पक्ष में हो जाए, यह जरूरी नहीं; लेकिन कोशिश हमें अपनी गलतियों को समझने और उन्हें कम करने का अवसर जरूर देती है।

हर सुबह हम नए संकल्प के साथ दिन की शुरुआत करते हैं। हम चाहते हैं कि आज हम कल से बेहतर बनें, अपने व्यक्तित्व में कुछ नया जोड़ें और जीवन में कुछ सार्थक करें। लेकिन हमें स्वयं से यह भी पूछना चाहिए कि क्या हमने अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाया? क्या हमारे कार्यों से किसी को प्रेरणा मिली? क्या हमने ऐसा कुछ किया, जिससे दूसरों की नजर में नहीं, बल्कि अपनी ही नजरों में हमारा कद ऊँचा हो सके?

जीवन में सबसे बड़ी उपलब्धि केवल पद, पैसा या प्रतिष्ठा प्राप्त करना नहीं है। असली सफलता तब है, जब रात को अकेले में स्वयं से नजर मिलाते हुए हमें अपने किए हुए कार्यों पर शर्म नहीं, बल्कि संतोष और गर्व महसूस हो।

अक्सर हम अपनी कमियों और असफलताओं के लिए परिस्थितियों को दोष देते हैं और कहते हैं—“समय ने साथ नहीं दिया।” लेकिन हर बार समय को दोष देना उचित नहीं है। कई बार हमें परिस्थितियों से ज्यादा अपने निर्णयों, अपने व्यवहार और अपने कर्मों की समीक्षा करने की जरूरत होती है।

 

आज के बदलते समाज में सादगी, संवेदनशीलता, समानता, संघर्ष और मानवीय मूल्यों की अहमियत पहले से कहीं अधिक है। किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके आचरण, विचार और व्यवहार से होती है।

हमें यह भी समझना होगा कि जो नियम या रास्ता किसी दूसरे के लिए सही है, जरूरी नहीं कि वह हमारे लिए भी सही हो। बिना सोचे-समझे किसी की नकल करना समझदारी नहीं है। हमें अपने विवेक, संस्कार और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

जीवन हमें हर दिन एक नया अवसर देता है—कुछ बेहतर करने का, किसी की मदद करने का, अपनी गलती सुधारने का और स्वयं को पहले से बेहतर इंसान बनाने का।

इसलिए हमारा प्रयास केवल इतना न हो कि लोग हमें अच्छा इंसान कहें, बल्कि हमारा जीवन ऐसा हो कि जब हम स्वयं से सवाल करें तो हमारा अंतर्मन भी हमें अच्छा इंसान स्वीकार करे।

कर्तव्यों का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उन्हें निभाते समय हमारी नजरें दूसरों की प्रशंसा नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की स्वीकृति तलाशें। क्योंकि दुनिया की नजरों में बड़ा बनना आसान हो सकता है, लेकिन स्वयं की नजरों में बड़ा बनना ही जीवन की सच्ची उपलब्धि है।

Related Articles

Back to top button