कांग्रेस में उठी मांग: दरभंगा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सामाजिक प्रतिनिधित्व को मिले प्राथमिकता
कांग्रेस में उठी मांग: दरभंगा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सामाजिक प्रतिनिधित्व को मिले प्राथमिकता

जे टी न्यूज, दरभंगा: दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले के कांग्रेस समर्थक मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने दोनों सीटों पर पिछड़ा, अति पिछड़ा अथवा अनुसूचित जाति (दलित) वर्ग से उम्मीदवार उतारने की मांग उठाई है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही सामाजिक वर्ग के लोगों को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी को अपेक्षित राजनीतिक विस्तार नहीं मिल सका। उनका तर्क है कि व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने से कांग्रेस को इन चारों जिलों में संगठन मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवार चयन में स्थानीय सामाजिक समीकरण, संगठन में सक्रियता और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल पारंपरिक चेहरे पर निर्भर रहने के बजाय नए सामाजिक समीकरण के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है।
इधर, निवर्तमान राजनीतिक समीकरण और पूर्व में टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को लेकर भी कुछ कार्यकर्ताओं के बीच टिकट वितरण में गड़बड़ी और एनडीए से कथित नजदीकी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और मदन मोहन झा का पक्ष इस संबंध में उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह पिछले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर भी कुछ लोगों द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी चयन तथा कथित ‘डमी उम्मीदवार’ से संबंधित आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इससे भाजपा उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ और इसके एवज में धनराशि के लेन-देन की चर्चा थी। हालांकि, इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी नेतृत्व को इन चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए आगामी चुनाव में पारदर्शी तरीके से उम्मीदवार चयन करना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि दोनों सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को मौका मिले, जिनकी सामाजिक स्वीकार्यता के साथ-साथ पार्टी संगठन में भी मजबूत पकड़ हो।

