सृजन कला’ कार्यशाला में रचनात्मकता के साथ साहित्यिक चेतना का संदेश, दिनकर जयंती पर विशेष आयोजन

सृजन कला’ कार्यशाला में रचनात्मकता के साथ साहित्यिक चेतना का संदेश, दिनकर जयंती पर विशेष आयोजन

 

जे टी न्यूज़, बिरसिंहपुर/समस्तीपुर : संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, बिरसिंहपुर के स्वायत्त एवं नैक बी++ संस्थान में ‘सृजन कला (रचनात्मक कला तथा क्राफ़्ट वर्कशॉप )’ का शुभारंभ बुधवार को हुआ। दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 23 एवं 24 सितंबर को पी.पी. एन. सिंह सभागार में किया जा रहा है। कार्यशाला सहायक प्राध्यापक श्री नरेंद्र कुमार के पर्यवेक्षण में आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रशिक्षुओं को पेपर फ्लावर मेकिंग, मिश्रित सामग्री से क्राफ्ट आर्ट तथा लिप्पन आर्ट जैसी रचनात्मक कलाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला की प्रशिक्षक श्रीमती सुषमा कुमारी, बिहार स्कूल ऑफ म्यूजिक एंड ड्रामा, नवादा हैं।
इस अवसर पर 23 सितंबर को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया में हुआ था और उनकी साहित्यिक रचनाओं ने राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सरोकार एवं आत्मगौरव को अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या महोदया डॉ. रोली द्विवेदी ने कहा कि “शिक्षक-प्रशिक्षण केवल पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रशिक्षुओं की कल्पनाशीलता, सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति-कौशल को विकसित करने की भी प्रक्रिया है। कला एवं साहित्य शिक्षा को अनुभवात्मक बनाते हैं और भावी शिक्षकों को बच्चों की विविध प्रतिभाओं को पहचानने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने की दृष्टि प्रदान करते हैं।


उन्होंने कहा कि दिनकर जैसे साहित्यकारों का अध्ययन भावी शिक्षकों में भाषा के प्रति अनुराग के साथ-साथ सामाजिक चेतना, आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों को विकसित करने का माध्यम बन सकता है। उनके अनुसार कला, साहित्य और शिक्षा का समन्वय प्रशिक्षुओं के व्यक्तित्व विकास को अधिक व्यापक और सार्थक बनाता है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षुओं को ‘करके सीखने’ का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे। आयोजकों ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ शिक्षक-प्रशिक्षण को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाकर रचनात्मक, अनुभवात्मक और कौशल-आधारित शिक्षा से जोड़ती हैं।

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