विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए विशेष अभियान चलाने की उठी मांग, पर्यावरण चिंतक राकेश कुमार ने पेश की कार्ययोजना

काले डस्टबीन में इलेक्ट्रॉनिक कचरे का संग्रह कर अधिकृत केंद्रों तक पहुँचाने की पहल पर जोर

विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए विशेष अभियान चलाने की उठी मांग, पर्यावरण चिंतक राकेश कुमार ने पेश की कार्ययोजना

काले डस्टबीन में इलेक्ट्रॉनिक कचरे का संग्रह कर अधिकृत केंद्रों तक पहुँचाने की पहल पर जोर

 

जे टी न्यूज, ​अररिया: डिजिटल युग में लगातार बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के दुष्प्रभावों से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अब विद्यालय स्तर पर गंभीर पहल की जरूरत महसूस की जाने लगी है। इसी क्रम में सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षक सह पर्यावरण चिंतक राकेश कुमार ने विद्यालयों में ई-वेस्ट प्रबंधन, सुरक्षित संग्रह और वैज्ञानिक पुनर्चक्रण की व्यवस्था विकसित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की है और स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की जोरदार वकालत की है।
​पर्यावरण चिंतक राकेश कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि पुराने मोबाइल, चार्जर, कंप्यूटर, की-बोर्ड, माउस, प्रिंटर और अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कचरे में फेंकने या खुले में जलाने से मिट्टी, जल और वायु का भारी प्रदूषण होता है। ई-वेस्ट में कई ऐसे विषैले तत्व और रसायन मौजूद होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पूरी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इसके विपरीत, वैज्ञानिक पुनर्चक्रण के माध्यम से इसमें मौजूद तांबा, एल्युमिनियम और अन्य बहुमूल्य धातुओं को सुरक्षित रूप से पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
​विद्यालयों के लिए सुझाए गए मुख्य उपाय:
​’ई-वेस्ट संग्रह केंद्र’ की स्थापना: स्कूलों में स्पष्ट रूप से चिह्नित काले रंग के डस्टबीन रखे जाएं, जिनमें छात्र और शिक्षक अपना अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक कचरा जमा कर सकें।
​विशेष सुरक्षा और निपटान: बैटरियों, क्षतिग्रस्त लिथियम-आयन बैटरियों, सीएफएल (CFL) और टूटी हुई स्क्रीनों जैसे खतरनाक कचरे के लिए अलग और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की जाए।
​जागरूकता गतिविधियां: प्रार्थना सभाओं में विशेष चर्चा, पोस्टर एवं नारा प्रतियोगिताएं, ई-वेस्ट ऑडिट, विज्ञान परियोजनाएं, जन-जागरूकता रैलियां, अभिभावकों की सहभागिता और ‘ई-वेस्ट जागरूकता क्लब’ का गठन किया जाए।
​राकेश कुमार ने विश्वास जताया कि इस प्रकार की पहलों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, गहरी पर्यावरणीय चेतना और जिम्मेदार नागरिकता के गुणों का विकास होगा। इस पूरे अभियान का मूल मंत्र “ई-वेस्ट को न जलाएँ, न सामान्य कचरे में मिलाएँ; अलग संग्रह करें और अधिकृत पुनर्चक्रण केंद्र तक पहुँचाएँ” होना चाहिए, जिसे जन-जन तक पहुँचाए जाने की आवश्यकता है।

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