बिहार में मिड-डे मील योजना पर बड़ा सवाल: पाँच महीने से राशि लंबित, आखिर कैसे चलेगा बच्चों का भोजन?

बिहार के सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (PM POSHAN) के संचालन पर गहराता संकट!

बिहार में मिड-डे मील योजना पर बड़ा सवाल: पाँच महीने से राशि लंबित, आखिर कैसे चलेगा बच्चों का भोजन?

बिहार के सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (PM POSHAN) के संचालन पर गहराता संकट!

जे टी न्यूज, पूर्णिया: बिहार में मिड-डे मील योजना से जुड़ी राशि पिछले पाँच महीनों से लंबित रहने की समस्या ने विद्यालयों के सुचारु संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशि का भुगतान नहीं होने से विद्यालयों के सामने भोजन सामग्री की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। वहीं, वेंडर भी भुगतान के अभाव में अब सामान देने से हाथ खड़े करने लगे हैं।

स्थिति यह है कि एक ओर बच्चों को प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर योजना के संचालnन के लिए आवश्यक राशि समय पर उपलब्ध नहीं हो रही है।

सिर्फ विद्यालय ही नहीं, मिड-डे मील योजना से जुड़े प्रखंड संसाधन सेवियों का वेतन भी लंबित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन और निगरानी से जुड़े कर्मियों के समक्ष भी आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

*आखिर जिम्मेदार कौन?*

जब पाँच महीनों से राशि लंबित है, तो विद्यालयों में भोजन का संचालन कैसे होगा? वेंडर भुगतान के बिना कब तक सामग्री उपलब्ध कराएंगे? योजना से जुड़े कर्मियों को वेतन कब मिलेगा?

*सबसे बड़ा सवाल—क्या व्यवस्था की खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ेगा?*

मिड-डे मील केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के पोषण और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसलिए राशि के भुगतान में इतनी लंबी देरी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

*सरकार एवं विभाग से प्रमुख मांगें*

 

– लंबित राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
– वेंडरों के बकाये का शीघ्र निष्पादन किया जाए।
– मिड-डे मील से जुड़े प्रखंड संसाधन सेवियों के लंबित वेतन का भुगतान किया जाए।
– भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए नियमित भुगतान की ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
अब सवाल केवल भुगतान का नहीं, बल्कि बिहार के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के भोजन की निरंतरता का है। विभाग को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
बच्चों के पोषण से जुड़े इस ज्वलंत मुद्दे पर जवाबदेही और समाधान—दोनों जरूरी हैं।

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