विज्ञान भवन में सजेगा हिंदी का अंतरराष्ट्रीय मंच, अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों पर होगा मंथन
30-31 अक्टूबर को ‘भारतरत्न अटल: हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन प्रस्तावित
विज्ञान भवन में सजेगा हिंदी का अंतरराष्ट्रीय मंच, अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों पर होगा मंथन
30-31 अक्टूबर को ‘भारतरत्न अटल: हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन प्रस्तावित
जे टी न्यूज,
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, कृतित्व और विचारों पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन आगामी 30 और 31 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया जाएगा। विश्व हिंदी परिषद की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘भारतरत्न अटल: हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ रखा गया है। इसमें देश-विदेश के हिंदी विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां भाग लेंगी। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन प्रस्तावित है।
विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हिंदी की वैश्विक भूमिका, राष्ट्रवाद, सुशासन और अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों पर व्यापक विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में देश के प्रमुख राजनीतिक एवं सामाजिक व्यक्तित्वों के साथ 13 देशों के हिंदी विद्वानों की सहभागिता प्रस्तावित है।
वेंकैया नायडू, नितिन नवीन समेत कई प्रमुख हस्तियां होंगी शामिल
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत एवं प्रह्लाद जोशी, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई विशिष्ट व्यक्तियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा और पद्मश्री जयाप्रदा की सहभागिता भी प्रस्तावित है।
सम्मेलन में विदेशों से भी हिंदी के विद्वान हिस्सा लेंगे। इनमें अमेरिका से डॉ. मृदुल कीर्ति, जापान से डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. मधु खन्ना, लंदन से वंदना खुराना, चीन से डॉ. विवेकमणि त्रिपाठी, मॉरीशस से कल्पना लाल और कतर से शालिनी वर्मा सहित अन्य विद्वानों के नाम शामिल हैं।
‘अटल जी हिंदी के वैश्विक नायक और सुशासन के पर्याय थे’
विश्व हिंदी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. डी.पी. मिश्रा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हिंदी के वैश्विक नायक और सुशासन के पर्याय थे। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण आज भी भारतीय भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के प्रति प्रेरणा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य अटल जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक पहल करना है। उनके अनुसार, विज्ञान भवन में आयोजित यह सम्मेलन हिंदी के प्रचार-प्रसार और वैश्विक प्रतिष्ठा की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह ने कहा कि यह सम्मेलन अटल बिहारी वाजपेयी को सच्ची श्रद्धांजलि देने का अवसर है। देश-विदेश के विद्वानों का एक मंच पर जुटना हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शोध पत्रिका का लोकार्पण और विद्वानों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान ‘विश्व हिंदी अन्वेषिका’ शोध पत्रिका का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही 21 श्रेष्ठ शोध पत्रों के लेखकों को सम्मानित करने का कार्यक्रम है। हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विभिन्न मंत्रालयों एवं संस्थानों से जुड़े हिंदी अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और लेखकों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान किए जाएंगे। सम्मेलन के माध्यम से हिंदी भाषा, भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रवाद और सुशासन से जुड़े विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का प्रयास किया जाएगा।

