गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शैक्षणिक वातावरण का होना अनिवार्य- कुलपति प्रधानाचार्य डॉ राय की यह शोधपरक पुस्तक शैक्षिक- जगत के लिए बहुमूल्य- डा मुश्ताक

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शैक्षणिक वातावरण का होना अनिवार्य- कुलपति
प्रधानाचार्य डॉ राय की यह शोधपरक पुस्तक शैक्षिक- जगत के लिए बहुमूल्य- डा मुश्ताक


जे टी न्यूज़ ,दरभंगा : संसार में जितने भी शिक्षाविदों एवं मनोवैज्ञानिकों ने शिक्षा के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए हैं, उनमें उन्होंने बेहतर शैक्षणिक वातावरण को अनिवार्य बताया है। यदि वातावरण अनुकूल नहीं होगा तो बच्चों के मानसिक विकास में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। यही कारण है कि उनमें गुणात्मक विकास की गति हेतु शैक्षणिक वातावरण प्रेरक का काम करता है। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने एफएएटीटी कॉलेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य डा शशिभूषण राय लिखित “बच्चों की शिक्षा- दीक्षा में वंशानुक्रम तथा वातावरण का प्रभाव” नामक पुस्तक का अपने कार्यालय में विमोचन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि एक शिक्षक एवं प्रधानाचार्य अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों को पूरा करते हुए लेखन- कार्य में भी सक्रिय हैं, जिसका परिणाम यह पुस्तक है। यह न केवल शिक्षक- प्रशिक्षण कॉलेज के छात्र- छात्राओं के लिए, बल्कि शिक्षा में रुचि रखने वाले आमलोगों के लिए भी उपयोगी है। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव और सी एम कॉलेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो मुश्ताक अहमद ने कहा कि डा शशिभूषण राय को मैं स्कूल काल से ही जानता हूं। ये एक मेधावी छात्र रहे हैं और शिक्षक बनने के बाद ही पढ़ने- लिखने में रुचि रखते हैं। प्रधानाचार्य डा राय की यह शोधपरक पुस्तक शैक्षणिक जगत के लिए बहुमूल्य सिद्ध होगी। सत्यनारायण अग्रवाल ने कहा कि यह पुस्तक बच्चों का सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। डा नजीब अख्तर ने कहा कि यह न केवल छात्रों के लिए, बल्कि शिक्षकों के लिए भी उपयोगी है। डा सुजीत कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह पुस्तक दर्शाती है कि बच्चों की शिक्षा में वंशानुक्रम के साथ ही वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है। डा दीनदयाल भारद्वाज ने कहा कि इस पुस्तक में विद्यालय परिवेश, शिक्षकों तथा अभिभावकों की बालकों की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डा शशिभूषण राय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आईएसबीएन नंबर युक्त इस शोध- पुस्तक में सात अध्याय हैं। विमोचन कार्यक्रम में डा आर एन चौरसिया तथा जमाल अहमद आदि भी उपस्थित थे।

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