खाद की कालाबाजारी और घटियाँ गर्मा बीज की आड़ में सरकारी अनुदान की हो रही लूट की अविलंब जांच हो
खाद की कालाबाजारी और घटियाँ गर्मा बीज की आड़ में सरकारी अनुदान की हो रही लूट की अविलंब जांच हो
जे टी न्यूज, बेगूसराय:

संयुक्त किसान मोर्चा बिहार के संयोजक मंडल की ओर से किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह और दिनेश कुमार ने संयुक्त ब्यान जारी कर सरकार से मांग की है कि रबी और खरीफ सीजन के बीच बड़े पैमाने पर खाद की कालाबाजारी और नकली गर्मा मक्का और मूंग बीज में सरकारी अनुदान की हो रही भारी लूट की उच्च स्तरीय जांच किया जाए। विदित हो कि रब्बी सीजन समाप्त होने और खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों को खाद की जरूरत नहीं होती है और लोगों का ध्यान भी खाद की ओर नहीं रहती है। इसी ऑफ सीजन को अच्छा अवसर मानकर जिले के खाद माफियाओं ने बड़े पैमाने पर जिला के अंदर खाद की कालाबाजारी कर रहे है। जिसकी उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है। बेगूसराय के किसान जब रब्बी की बुआई में डीएपी मांग रहे थे,तो एन पी के दिया जा रहा था। आज जब डीएपी की जरूरत नहीं है,तो बेगूसराय में बड़े पैमाने पर डीएपी की बिक्री दिखाकर थौक बिक्रेताओं द्वारा लूट मचाई जा रही है।हमारा जिला प्रशासन गहरी निंद्रा में सोयी हुई है और हमारे जनप्रतिनिधि तमासबीन बन बैठे हैं।खाद की कालाबाजारी का बानगी के तौर पर एक जीता जागता सबूत दे रहा हूँ।

1से 10 अप्रैल 2026 के बीच तेघरा प्रखंड के खुदरा खाद बिक्रेता मेसर्स रजनीश कृषि केंद्र जो हमेशा बंद रहता है,वहाँ 3582 बोरा डीएपी और 1018 बोरा यूरिया की कागज पर फर्जी बिक्री दिखाया गया है,शशि बीज भंडार भगवानपुर द्वारा 1461 बोरा डीएपी और 674 बोरा यूरिया की बिक्री दर्शाया गया है।इसी प्रकार मनसूरचक प्रखंड के कस्टोली तेजस कृषि प्रोड्यूसर ने 847 बोरा और रौशन कृषि केंद्र ने 700 बोरा डीएपी की फर्जी बिक्री किया है। सच्चाई यह है कि यह सब पाॅस मशीन पर खेला हो रहा है।सब खाद थौक बिक्रेता के पास है।भाड़ा भी नहीं लगा और खेल हो गया। तेघरा बी ए ओ ने कहा कि यह बिक्री संदेहास्पद है,वही मनसूचक बी ए ओ ने शायद खाद माफियाओं से मोटा रकम लेकर इस कालाबाजारी को क्लीन-चीट दे दिया है।इसी प्रकार संपूर्ण जिला में खाद माफियाओं द्वारा खाद की कालाबाजारी हो रही है और सीजन में खाद का घोर अभाव दिखाकर पुनः किसानों को लूटने की तैयारी चल रही है। इसी प्रकार बीज की कालाबाजारी भी हो रही है।गर्मा बीज के लिए उन्नत किस्म का बीज डिकाल्व का 7074 प्रभेद या पायनियर का किसानों को पहले वितरित होता था। गर्मा बीज का वितरण 31 मार्च तक हो जाना चाहिए था,वह अब बाँटने का नाटक प्रखंडों में चल रहा है। मक्का के प्रति किलो बीज पर डेढ़ सौ रुपया तथा मूंग के प्रति किलो बीज पर 60 रु प्रति किलो सरकारी अनुदान की लूट में बिहार का सबसे बड़ा बीज माफिया जो कृषि मंत्री एवं कृषि विभाग के बड़े-बड़े अधिकारियों को भी इधर से उधर करवाने की ताकत रखता है।उसे बीज आपूर्ति का पुरा ठेका मिल गया है।जो बिना गुणवत्ता के नकली बीज भारत बीज कंपनी के नाम पर जूट का बोरा में प्रभेद पी एम एच -12 लिखकर बड़े पैमाने पर पूरे बिहार में वितरण करवा रहा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। बर्षो से बीज निगम में इनकी दादागिरी के चलते बड़े पैमाने पर सरकारी अनुदान राशि की हर सीजन में लूट हो रही है। इसी प्रकार विगत दिनों मंसूरचक के फाटक चौक पर अजीत गुप्ता के यहां छापामारी में 6 गोदाम में नकली इंडोफिल थाइमेट का ड्राम बिना किसी कागजी सबूत का मिला, मगर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसकी उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है। यदि अविलंब कार्रवाई नहीं हुई,तो संयुक्त किसान मोर्चा सीधी कार्रवाई में जाने को मजबूर होंगे।जिसकी सारी जवाबदेही सरकार और जिला प्रशासन की होगी।


