डॉ रणजीत कुमार दिनकर की कवितायें

जे टी न्यूज
1. काली दास प्रिया
आकाश में चमकते
टीम -टीमा ते -सितारे
फार कर
बादलों की काली
बंधन को तोड़कर /
कि तोरकर, कलकी दरवाजा
आज भी
तराश्ते हुए /तलाशते
जैसे समाज
जैसे धर्म
जैसे कर्म
आज
सुरक्षा सुमन की सी
वसी है ह्रदय तल में
काली दास प्रिया.।
“2”
बाबा साहेब कुछ तो बोलो
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क्यों रोते हो
कुछ तो बोलो
कभी अपनी जुवान तो खोलो
बे जुवान की लगाम तो खोलो
खुली आँखे
न देख पा रही
किताब के पन्ने
बंद क्योहै
क़ानून दिया
संविधान दिया
युग -युग का
सम्मान दिया
सबको मान दिया
आज कर्मकार रो रहा क्यों
बुड्ढा बाबू.
माथा ठोक क्यों बैठे है
लाठी क्यों बरसाते बेटा
अब क्यों लाचार है
अब
उनके पास न पेंशन का दरकार है
क्यों आज
लाचार सरकार है।
बाबा साहेब की संबिधान की सरकार है.।

