बिहार में हिजा़ब को विधि व्यवस्था के लिये खतरे के तौर पर चिन्हित करना चिन्तनीय है – माकपl
बिहार में हिजा़ब को विधि व्यवस्था के लिये खतरे के तौर पर चिन्हित करना चिन्तनीय है – माकपl

जे टी न्यूज (पटना)। किसी न किसी बहाने अल्पसंख्यक समुदाय को अपमानित करने का सिलसिला ब दस्तूर जारी है, जिसमें सूबाई सरकार का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। सी पी आई (एम) राज्य कमिटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि अभी हाल ही में हिजाब को कानून व्यवस्था के लिए खतरे के रूप में चिन्हित किया जाना शर्मनाक है। व्यावसायिक संघ का यह फैसला जिसे बिहार सरकार ने भी भरपूर समर्थन दिया है कि हिजाब पहनकर मुस्लिम औरतें सर्राफा दुकानों में नहीं जा सकती, मुस्लिम समुदाय के पारंपरिक परिधानों पर एक सांस्कृतिक हमला है। स्पष्ट है जदयु और भाजपा के इशारे पर यह फैसला थोपा गया है। आज बिहार में कहीं भी विधि व्यवस्था नजर नहीं आती है। चोरी, डकैती,बलात्कार के साथ ही कमजोर वर्गों पर जुल्म की घटनाएं सारे रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में हिजाब जो कि मुस्लिम महिलाओं की शर्मो-हया से जुड़ी है, निशाना बनाना इस समुदाय को हताश करने तथा दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की साजिश है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मेडिकल छात्रा का हिसाब खींचना तथा उसे भाजपा से जुड़े नेताओं द्वारा उचित ठहराते हुए पीड़िता का ही मजाक बनाना आदि घटना के बाद अब बिहार में भी हिजाब को एक मुद्दा बनाया जा रहा है।इसे कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। माकपा राज्य सचिव ललन चौधरी के साथ ही माकपा विधायक अजय कुमार , राज्य सचिवमंडल सदस्य अहमद अली एवं मनोज चन्द्रबंशी आदि नेताओं ने इस साम्प्रदायिक फैसले की घोर निन्दा करते हुए इसे तुरत वापस लेने की मांग की।



