जनमत नहीं, रणनीति से रची जा रही सत्ता की स्क्रिप्ट” – दिवाकर सिंह का बड़ा वार
जनमत नहीं, रणनीति से रची जा रही सत्ता की स्क्रिप्ट” – दिवाकर सिंह का बड़ा वार

जे टी न्यूज, पूर्णिया/पटना:
बिहार की सियासत में चल रही हलचल के बीच कांग्रेस नेता दिवाकर सिंह ने ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया “बेहद खामोशी से” और जदयू के शीर्ष नेतृत्व को माध्यम बनाकर आगे बढ़ाई जा रही है।
दिवाकर सिंह ने कहा कि भाजपा यह जानती है कि बिहार में वह अपने दम पर जनमत हासिल कर सत्ता में नहीं आ सकती, इसलिए पर्दे के पीछे से राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं।
*“नीतीश कुमार को किनारे करने की कोशिश”*
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वर्तमान परिस्थितियों और स्वास्थ्य को आधार बनाकर जिस प्रकार सियासी चालें चली जा रही हैं, वह बिहार की राजनीतिक संस्कृति के अनुकूल नहीं है।
“जिस व्यक्ति ने वर्षों तक बिहार को विकास की दिशा दी, उसे इस तरह सत्ता से हटाने की कोशिश लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है।”
*राज्यसभा से लेकर सत्ता तक – केंद्र की भूमिका पर सवाल*
दिवाकर सिंह ने हालिया राज्यसभा नामांकन प्रक्रियाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें केंद्र के शीर्ष नेतृत्व की सीधी सक्रियता दिख रही है।
उनका आरोप है कि भाजपा का मकसद बिहार में किसी भी तरह सत्ता स्थापित करना है, न कि राज्य के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना।
*“जनता सब देख रही है”*
अपने बयान के अंत में उन्होंने साफ कहा—
“लोकतंत्र में आखिरी फैसला जनता का होता है। बिहार की जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।”
*सियासी मायने क्या हैं?*

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष की आगामी रणनीति का संकेत भी हो सकता है। बिहार में बदलते समीकरणों के बीच अब हर बयान नए राजनीतिक संकेत दे रहा है।
सवाल यह है —
क्या सचमुच सत्ता परिवर्तन की कोई ‘साइलेंट स्क्रिप्ट’ लिखी जा रही है?
या यह केवल सियासी बयानबाजी है?
बिहार की राजनीति फिलहाल उबाल पर है — और आने वाले दिन तय करेंगे कि यह बयान महज आरोप है या किसी बड़े बदलाव की आहट।

