पूसा में उठे सवाल डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार पर ईओयू की कार्रवाई के बाद कार्यकाल पर घिरे सवाल
पूसा में उठे सवाल डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार पर ईओयू की कार्रवाई के बाद कार्यकाल पर घिरे सवाल

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: सहरसा में तैनात डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की बड़ी कार्रवाई के बाद अब उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर पूसा में भी सवाल उठने लगे हैं। वैभव कुमार पहले पूसा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) रह चुके हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर उनके कार्यकाल की पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मंगलवार को ईओयू की छापेमारी में वैभव कुमार के विभिन्न ठिकानों से आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलने के बाद यह मामला सुर्खियों में है। जांच में उनके और उनके परिवार के नाम पर 16 प्लॉट, करोड़ों की जमीन-जायदाद और विभिन्न निवेश के दस्तावेज सामने आए हैं। ईओयू ने उनके खिलाफ 78.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया है।
पूसा में कार्यकाल पर उठे सवाल
पूसा प्रखंड में वैभव कुमार के बीडीओ रहने के दौरान कई विकास योजनाएं संचालित हुई थीं। अब स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि उस समय योजनाओं के क्रियान्वयन, निविदाओं और खर्च की प्रक्रिया की निष्पक्षता की भी जांच होनी चाहिए।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर उस दौरान वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, तो उनकी परतें अब खुल सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी ने पूसा में अलग से जांच शुरू करने की पुष्टि नहीं की है।
ट्रस्ट और निवेश पर भी चर्चा

ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि वैभव कुमार ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से आईटीआई संस्थान संचालित किया, जिसमें करीब 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। इसके अलावा उनकी पत्नी, पुत्र और पिता के नाम पर संपत्तियां अर्जित की गईं।
इन खुलासों के बाद पूसा में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या उनके कार्यकाल के दौरान अर्जित संसाधनों का कोई संबंध स्थानीय पदस्थापन से भी रहा है।
विभागीय कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित योजनाओं की समीक्षा कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
ईओयू ने इस मामले में ग्रामीण विकास विभाग को भी रिपोर्ट भेजी है, जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
देखना तो यह होगा कि
क्या आगे ईओयू की जांच जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। ऐसे में पूसा में वैभव कुमार के कार्यकाल से जुड़ी फाइलें और योजनाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं, जिस पर सबकी नजर टिकी हुई है।



