युवा आबादी को मानव पूंजी में बदलना विकसित भारत की सबसे बड़ी जरूरत

युवा आबादी को मानव पूंजी में बदलना विकसित भारत की सबसे बड़ी जरूरत

जे टी न्यूज़, समस्तीपुर : वीमेंस कॉलेज, समस्तीपुर के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य में “विकसित भारत @2047 के संदर्भ में भारत की युवा जनसंख्या: अवसर, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर विभागीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने की, जबकि स्वागत, विषय प्रवेश एवं संचालन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, बशर्ते उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आधुनिक कौशल और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसके गुणात्मक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शिक्षित, स्वस्थ और कुशल युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकते हैं।
विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश होने के साथ-साथ दुनिया के सबसे युवा देशों में भी शामिल है। देश के पास जनसांख्यिकीय लाभांश का एक महत्वपूर्ण अवसर है, लेकिन यह लाभ अपने आप प्राप्त नहीं होगा। यदि युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार से नहीं जोड़ा गया तो यही जनसांख्यिकीय अवसर भविष्य में चुनौती में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आज बहस केवल “जनसंख्या कितनी है” पर नहीं, बल्कि “जनसंख्या कितनी शिक्षित, स्वस्थ, कुशल और उत्पादक है” पर होनी चाहिए। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जनसंख्या को मानव पूंजी में बदलना सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
समाजशास्त्री डॉ. रंजन कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में युवाओं के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। रोजगार की बदलती प्रकृति के अनुरूप कौशल, डिजिटल साक्षरता और नवाचार की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने युवाओं से बदलते समय के अनुरूप स्वयं को तैयार करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इतिहास के प्राध्यापक डॉ. सुरेश साह ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध उपलब्ध संसाधनों, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता से है। सीमित संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और जनसंख्या के प्रति जागरूकता सतत विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षा और जागरूकता को जनसंख्या स्थिरीकरण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।


परिचर्चा में छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। बुशरा परवीन, दिव्या भारती, साक्षी और खुशी सहित अन्य छात्राओं ने भाषण एवं आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से जनसंख्या से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता का संदेश दिया। छात्राओं ने छोटे परिवार, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा युवा शक्ति के सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य केवल बढ़ती जनसंख्या के प्रति चिंता व्यक्त करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता को समझना भी है। वक्ताओं ने कहा कि भारत के लिए जनसंख्या अपने आप में न तो बोझ है और न ही वरदान; उसका स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि हम उसे किस प्रकार शिक्षित, कुशल और उत्पादक मानव पूंजी में बदलते हैं।
मौके पर डॉ मधुलिका मिश्रा, डॉ. फरहत जबीं, डॉ. कविता वर्मा, डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. स्मिता कुमारी, डॉ. अपूर्वा मुले, डॉ. रितु संगवान, डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. स्वीटी दर्शन, डॉ. सुमन कुमारी, डॉ. सोनी सिन्हा, डॉ. आभा कुमारी, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. बबली कुमारी एवं डॉ. कल्पना सिंह सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित थे।

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